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उत्तराखंड में फिर आएगी तबाही?

देहरादून, 5 जुलाई: उत्तराखंड के मुसीबत ज़दा इलाके में धूप-छांव का दौर जारी है। बादल गरज के साथ बरस भी रहे हैं। दो दिनों के अंदरून भारी बारिश का इम्कान है। काले बादलों की आमदरफ्त उन 250 गांवों के लोगों का कलेजा बैठा रही है जिनके पास अभी त

देहरादून, 5 जुलाई: उत्तराखंड के मुसीबत ज़दा इलाके में धूप-छांव का दौर जारी है। बादल गरज के साथ बरस भी रहे हैं। दो दिनों के अंदरून भारी बारिश का इम्कान है। काले बादलों की आमदरफ्त उन 250 गांवों के लोगों का कलेजा बैठा रही है जिनके पास अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची है।

इन गांवों के लोग जैसे-तैसे पल काट रहे हैं। पिथौरागढ़ में 15 हजार लोगों के भुखमरी के कगार पर पहुंचने की खबर है। लापता लोगों के बारे में उत्तराखंड हुकूमत ने अपनी पालिसी का ऐलान कर दिया है। लापता हुए 3,064 लोगों में से जो 15 जुलाई तक नहीं मिलेंगे, उन्हें इस हुए तबाही में मरा हुआ मान लिया जाएगा और उनके घर वालों को माली मदद दी जाएगी। वज़ीर ए आला विजय बहुगुणा ने कहा है कि घरवालो को इक्तेसादी मदद देने का अमल 30 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी।

वाजेह है कि लापता लोगों में सबसे ज्यादा लोगो की तादाद उत्तर प्रदेश के लोगों की है।

16-17 जून को आई तबाही के ज़ख़्मो की टीस अभी कम नहीं हुई है कि मौसम फिर से डराने वाले इशारे दे रहा है। तबाही से मुतास्सिर चमोली और पिथौरागढ़ में भी भारी बारिश का अंदेशा है। सबसे खराब हालात रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों के दो सौ से ज्यादा गांवों की है जहां 18 दिन बाद भी सरकारी मदद नहीं पहुंची।

खराब मौसम की वजह से वादियो में बसे इन गांवों तक हेलीकॉप्टर नहीं पहुंच पा रहे हैं। सड़क का रास्ता टूट जाने से उनके निकलने या उन तक पहुंचने का ज़रिया नहीं बन पा रहा है। हजारों लोग और जानवर भुखमरी के कगार पर हैं। इनके इलावा उन सैकड़ों गांवों में भी बड़ी आबादी फंसी हुई है जिनका काफी-कुछ बर्बाद हो चुका है लेकिन वे घर-जानवर छोड़कर महफूज़ वाले मुकाम पर नहीं जा रहे।

वे हेलीकॉप्टरों से गिराई जा रही राहत वाली अशिया पर मुन्हसिर हैं। अगर बादलों ने कहर बरपाया तो उनकी मुश्किल बढ़ जाएगी। रियासत की बीजेपी ने हालात की तस्दीक करते हुए हुकूमत की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे को फर्जी बताया है।

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