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उधेड़ उमर में ज़हनी उलझनें हूँ तो बुढ़ापे में पागल पन का ख़तरा

अमरीकी माहिरीन नफ़सियात ने कहा कि उधेड़ उमर में अगर किसी को ज़हनी उलझनें दरपेश हूँ तो बुढ़ापे में उसे पागल होने का ख़तरा लाहक़ होसकता है या फिर निसियाँ के मर्ज़ का अंदेशा होता है। अमरीकी तहक़ीक़ी रिसाला आम नफ़सियात के कारनामे है।

अमरीकी माहिरीन नफ़सियात ने कहा कि उधेड़ उमर में अगर किसी को ज़हनी उलझनें दरपेश हूँ तो बुढ़ापे में उसे पागल होने का ख़तरा लाहक़ होसकता है या फिर निसियाँ के मर्ज़ का अंदेशा होता है। अमरीकी तहक़ीक़ी रिसाला आम नफ़सियात के कारनामे है।

इस में शाय शूदा ताज़ा तरीन तहक़ीक़ के मुताबिक़ इस तहक़ीक़ में 13 हज़ार अफ़राद शामिल थे, जिन्हें ज़हनी उलझनें दरपेश थीं। इन की जिस्मानी सेहत का भी मुआइना किया गया और तहक़ीक़ से ये नतीजा अख़ज़ किया गया कि बुढ़ापे में पागलपन और अलज़हीमर के मरीज़ों की 20 फ़ीसद तादाद उधेड़ उमर में ज़हनी उलझनों के शिकार अफ़राद की थी।

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