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उना दलित पिटाई मामला: दलित लेखक “अमृतलाल मकवाना” गुजरात सरकार से मिला अवार्ड लौटाएंगे

नई दिल्ली। गुजरात के उना में दलित युवकों की पिटाई का मामला अब अवॉर्ड वापसी तक पहुंचने लगा है। पिटाई का विरोध करते हुए गुजरात के दलित लेखक अमृतलाल मकवाना ने कहा है कि वे राज्य सरकार से मिले पुरस्कार को वापस लौटाएंगे। इसकी घोषणा करते हुए उन्होंनेे आरोप लगाया कि प्रशासन को दलितों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है।

मकवाना ने बताया कि वह बुधवार को अपना पुरस्कार और उसके साथ मिली 25,000 रुपये की राशि अहमदाबाद के जिलाधिकारी को वापस लौटाएंगे। सुरेन्द्रनगर जिले में वाधवान कस्बे के निवासी मकवाना ने कहा कि गुजरात में ऐसी घटनाएं अक्सर हो रही हैं, लेकिन सरकार दलितों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है।

बता दें कि कांग्रेस से जुड़े इस लेखक को गुजरात सरकार ने 2012-13 का ‘दासी जीवन श्रेष्ठ दलित साहित्य कृति अवार्ड’ दिया था। लेखक को 25,000 रुपये नकद, एक प्रमाणपत्र और शॉल दिया गया था।

मकवाना ने कहा कि गिर सोमनाथ जिले के मोटा समधियाला गांव में जो हुआ वह बहुत भयावह और क्रूर है। दलितों के प्रति ऐसा अत्याचार निंदनीय है और उसने मुझे अंदर तक हिला दिया। दुख की बात है कि ऐसी घटनाएं हमारे आसपास लगातार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि करीब 50 लोग कुछ दलित युवकों की पिटाई करते हैं लेकिन सिर्फ 16 गिरफ्तार होते हैं। बाकि अभी तक आजाद क्यों घूम रहे हैं? मुझे सरकार की मंशा पर संदेह है। मुझे अब सरकार में विश्वास नहीं है। यदि नेताओं के मन में दलितों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है, तो ऐसा पुरस्कार रखने का कोई औचित्य नहीं है।

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