Wednesday , September 20 2017
Home / Khaas Khabar / उप्र में 17 अति पिछड़ी जातियों को एस सी केटेगरी में करने से असली फायदा यादवो को

उप्र में 17 अति पिछड़ी जातियों को एस सी केटेगरी में करने से असली फायदा यादवो को

सियासत संवाददाता: लखनऊ:  मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कल कैबिनेट मीटिंग में चुनावी दाव खेलते हुए १७ अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों को शामिल करने का निर्णय ले लिया. सभी जानते हैं कि अनुसूचित जाति की श्रेणी में किसी भी जात को शामिल करने का अधिकार सिर्फ संसद को हैं. फिर अखिलेश ने ऐसा निर्णय ठीक चुनाव से पहले क्यों लिया. सीधा सा जवाब की अखिलेश आने वाले विधान सभा चुनाव में इन १७ जातियों को अपने पाले में खड़ा करना चाहते हैं.

वो दूसरी पार्टियों को इस मुद्दे पर घेरना भी चाहते हैं. सन २००५ में जब मुलायम ने पहली बार ऐसा ही फैसला लिया था और एक प्रस्ताव केंद्र को भेजा था तब से ऐसे प्रस्ताव तीन बार और जा चुके हैं. मामला वहीँ का वहीँ हैं. कल से सपा के वो नेता जो इन १७ जातियों से हैं जैसे मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति घूम घूम कर बता रहे हैं की उनके असली खेवनहार सिर्फ अखिलेश हैं और सपा ने ही सिर्फ उन्हें बार ध्यान दिया हैं. मायावती अपने स्तर पर इसे छल और कपट भरा कदम बता रही हैं.

लेकिन इस खेल में असली कहानी कुछ और भी हैं. ठीक है की इन १७ जातियों को अखिलेश अपने पक्ष में करना चाहते हैं. यह जातियां लगभग १४ प्रतिशत हैं. अनुसूचित जाति में शामिल होने से ये अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी केटेगरी से बहार हो जाएँगी. वो आरक्षण में ओबीसी के दायरे से भी बाहर हो जाएँगी. ओबीसी का आरक्षण इस समय २७ प्रतिशत हैं. उसमे से एकदम से १४ प्रतिशत जनसँख्या वाली जातियों के बाहर होने से सीधा सा फायदा ओबीसी केटेगरी को होगा.

अब ओबीसी केटेगरी में सबसे प्रभावशाली यादव जाति है जोकि समाजवादी पार्टी की समर्थक हैं. प्रदेश में इनकी जनसख्या ११-१३ प्रतिशत बताई जाति हैं. ओबीसी केटेगरी से किसी जाति के बाहर होने का सबसे बाद अफय्दा यादवो को होगा. ज़ाहिर सी बात हैं की ऐसा करने से सबसे ज्यादा फायदा सपा को होगा. अखिलेश ने कैबिनेट में यही किया हैं. इन १७ अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल ५ जातियों की उपजाति बताया हैं और शासनादेश जारी करने के आदेश दे दिए.

अब ये सब अनुसूचित जाति की श्रेणी में हो जाएगी और ओबीसी केटेगरी में कम्पटीशन्स कम हो जायेगा. बसपा प्रमुख मायावती ये बात पहले ही समझ गयी थी. इसीलिए २००७ में सरकार बन्ने पर उन्होंने पहले मुलायम द्वारा भेजा गया प्रस्ताव रद्द कर दिया था. दूसरा प्रस्ताव भेजा जिसमे साफ़ कह दिया की इन १७ जातियों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल कर लिया जाए लेकिन एस सी केटेगरी के आरक्षण का कोटा बढाया जाये. ज़ाहिर सी बात हैं ऐसे ही अगर ये १७ जातियां एस सी केटेगरी में शामिल होती तो फिर उसी कोटे में आरक्षण में पहले से मौजूद जातियों के कोटे में हिस्सा बन जाति.

ऐसे में उनके दलित वोट बैंक पर असर पड़ने की आशंका थी. दलित चूँकि मायावती के साथ हैं इसीलिए ऐसे किसी भी कृत्य को उन्हें रोकना पड़ा. दावा चाहे कोई कुछ करें लेकिन ये सिर्फ दूसरी जाति को फायदा देना नहीं बल्कि अपनी जाति को ज्यादा फायदा पहुचाने वाली बात हैं.

TOPPOPULARRECENT