Wednesday , October 18 2017
Home / India / उबूरी बजट पर अपोज़िशन की तन्क़ीद खारिज‌

उबूरी बजट पर अपोज़िशन की तन्क़ीद खारिज‌

मईशत के यू पी ए हुकूमत की जानिब से इंतेज़ामात पर तन्क़ीद करने वालों के ख़िलाफ़ रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए मर्कज़ी वज़ीर फाइनांस‌ पी चिदम़्बरम ने आज कहा कि यू पी ए हुकूमत ने मईशत को मुश्किल सूरत-ए-हाल से बाहर निकाल कर उसे आली शरह तरक

मईशत के यू पी ए हुकूमत की जानिब से इंतेज़ामात पर तन्क़ीद करने वालों के ख़िलाफ़ रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए मर्कज़ी वज़ीर फाइनांस‌ पी चिदम़्बरम ने आज कहा कि यू पी ए हुकूमत ने मईशत को मुश्किल सूरत-ए-हाल से बाहर निकाल कर उसे आली शरह तरक़्क़ी के राते पर‌ डाला है।

उन्होंने उबूरी बजट को मक़बूल आम क़रार देने के तबसरा को खारिज‌ करते हुए कहा कि गुज़िशता चंद साल से हुकूमत बचाओ कार्रवाई में मसरूफ़ है जैसा कि दुनिया की दीगर तमाम हुकूमतें अंजाम दे रही हैं। उन्होंने कहा कि खुले अलफ़ाज़ में गुज़िशता चंद साल से हकूमत-ए-हिन्द भी दुनिया की दीगर हुकूमतों की तरह कार्रवाई कररही है।

उन्हें इस बात को उजागर करने में तकलीफ़ होती है कि इस तरीका-ए-कार में हम अकेले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हर वज़ीरे फाइनांस‌ का कहना है कि वो बचाओ कार्रवाई में मसरूफ़ हैं इस लिए 2013 के बजट में उन्होंने जो कुछ किया था और 2014 के उबूरी बजट में उन्होंने जो कुछ तजवीज़ किया है उसको शरह तरक़्क़ी की बहाली समझा जाना चाहिए जबकि पूरी दुनिया की मईशत कमज़ोर होचुकी है और उनके ख़्याल में हिन्दुस्तान मुंसिफ़ाना इक़दामात करने में कामयाब रहा है।

चिदम़्बरम ने एक ख़ुसूसी इंटरव्यू देते हुए कहा कि मईशत बहाल होचुकी है ।.4 फ़ीसद शरह तरक़्क़ी पहली सहि माही और 4.8 फ़ीसद शरह तरक़्क़ी दूसरी सहि माही में हासिल होगई है और एक तख़मीना के बमूजब तीसरी सहि माही और चौथी सहि माही में कम अज़ कम 5.2 शरह तरक़्क़ी मुतवक़्क़े है।

उन्होंने कहा कि बहुत कम ममालिक ऐसा कारनामा गुज़िशता 18 माह में अंजाम दे सके हैं। चुनांचे हालाँकि वो पूरी तरह ख़ुश नहीं है लेकिन वाज़िह करना चाहते हैं कि हम ने जो मक़ासिद हासिल किए हैं वो वाजिबी इक़दामात का नतीजा है और हुकूमतें 10 नकाती एजंडे पर पेशरफ़त कररही है जिस का ख़ाका उनकी तक़रीर के इख़तेताम पर उन्होंने पेश किया है।

उन्होंने कहा कि हम दुबारा आली शरह तरक़्क़ी के रास्ते पर होंगे ।बजट के बारे में रद्द-ए-अमल दरयाफ़त करने पर उन्होंने कहा कि जब उन के नाक़िदीन कह रहे हैं कि हिन्दुस्तान में मसाइल सिर्फ़ बैन-उल-अक़वामी सूरत-ए-हाल की वजह से नहीं है वो कुछ भी कहना नहीं चाहते लेकिन हिन्दुस्तान में मौजूद मसाइल दुनिया के हर मुल्क में मौजूद हैं और उसकी बड़ी वजह बैन-उल-अक़वामी सूरत-ए-हाल है।

उन्होंने तस्लीम किया कि माज़ी में चंद गलतीयां की गई हैं। इस सवाल पर कि गलतीयां कौनसी हैं चिदम़्बरम ने माहिर मआशियात टी एन श्रीनिवासन का हवाला दिया जिन्होंने एक मज़मून तहरीर किया है जिस में कहा गया है कि तहरीक देने वाला पैकेज ग़ालिबन ज़रूरी था लेकिन गहरे तजज़िये से ज़ाहिर होगया है कि दूसरे और तीसरे तहरीक देने वाले पैकेज‌ ज़रूरी नहीं थे लेकिन ये फ़ैसला तंगनज़री पर मबनी है।

क्योंकि उस वक़्त के हालात मुख़्तलिफ़ थे । उस वक़्त जो मालूमात दस्तयाब थी उन के मुताबिक़ फ़ैसला किया गया था कि यके बाद दीगरे तीन तहरीक देने वाले पैकेजस‌ पेश किए जाएं लेकिन इन तीनों पैकेजस से वाज़िह तौर पर कोई फ़वाइद हासिल नहीं हुए । शरह तरक़्क़ी पहले ही 8 फ़ीसद से ज़्यादा थी लेकिन मालीयाती ख़सारा की हुदूद की ख़िलाफारज़ी की गई और इफ़रात-ए-ज़र तक़रीबन बेक़ाबू होगया था।

TOPPOPULARRECENT