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उर्दू एकेडेमी की जानिब से बिस्ट उर्दू टीचर्स एवार्डज़ का एहया(फिर से आगाज)

आंध्रा प्रदेश रियासती उर्दू एकेडेमी ने 2007-के बाद अब बेस्ट उर्दू टीचर एवार्ड देने का ऐलान किया है। तालीमी साल 2011-12-के दौरान ख़िदमात अंजाम देने वाले बेस्ट उर्दू टीचर्स को एवार्ड के मुताल्लिक़ डाक्टर एस ए शकूर डाइरेक्टर सेक्रेटरी उ

आंध्रा प्रदेश रियासती उर्दू एकेडेमी ने 2007-के बाद अब बेस्ट उर्दू टीचर एवार्ड देने का ऐलान किया है। तालीमी साल 2011-12-के दौरान ख़िदमात अंजाम देने वाले बेस्ट उर्दू टीचर्स को एवार्ड के मुताल्लिक़ डाक्टर एस ए शकूर डाइरेक्टर सेक्रेटरी उर्दू एकेडेमी ने आज एक प्रेस कान्फ़्रैंस से ख़िताब के दौरान ये बात बताई। उन्हों ने बताया कि हर ज़िला में पाँच एवार्ड्स उर्दू के बहतरीन टीचर्स को दीए जाएंगे जिन में प्राइमरी स्कूल, अप्पर प्राइमरी स्कूल और हाई स्कूल के टीचर्स के इलावा कॉलेज की सतह पर जूनीयर और डिग्री कॉलिज के एक लेक्चरार को ये एवार्ड दिया जाएगा।

पाँच हज़ार रुपये और सनद (सरटिफिकेट)पर मुश्तमिल एस एवार्ड के लिए दरख़्वास्तें दाख़िल करने की आख़िरी तारीख 30 जून मुक़र्रर की गई है। डाक्टर एस ए शकूर ने बताया कि हर ज़िला से पाँच असातिज़ा (टीचर)(टिचर) को एवार्ड के इलावा रियासती सतह पर दो तिब्बी असातिज़ा (टीचर) और तीन यूनीवर्सिटी सतह के असातिज़ा (टीचर) को एवार्ड्स दीए जाएंगे। उन्हों ने बताया कि एवार्ड्स हासिल करने के ख्वाहिशमंदों को दरख़ास्त दाख़िल करना लाज़िमी होगा।

उर्दू एकेडेमी की कारकर्दगी का तज़किरा करते हुए उन्हों ने बताया कि गुज़श्ता कई बरसों से ये एवार्ड्स नहीं दीए गए थे जिस के सबब उर्दू के फ़रोग़ के लिए ख़िदमात अंजाम देने वाले असातिज़ा (टीचर) की हौसला अफ़्ज़ाई नहीं होपाई थी, लेकिन इस मर्तबा तालीमी साल 2011-12-के असातिज़ा (टीचर) को अंदरून दो माह एवार्ड्स देने का फैसला किया है। डाक्टर एस ए शकूर ने बताया कि दरख़ास्त फ़ार्म के साथ साथ असातिज़ा (टीचर) को डिप्टी इन्सपैक्टर आफ़ स्कूलस या डिस्ट्रिक्ट एजूकेशन ऑफीसर की जानिब से तसदीक़ (पुष्टि) मुंसलिक करनी होगी

जब कि जूनीयर-ओ-डिग्री कॉलिज लेक्चरारस के लिए प्रिंसिपल और आर आई डी ई वे ओ की जानिब से तसदीक़ (पुष्टि) मुंसलिक करनी(लगानी) होगी। यूनीवर्सिटी असातिज़ा (टीचर) के लिए सदर शोबा, प्रिंसिपल या रजिस्ट्रार से तसदीक़ (पुष्टि) शूदा अस्नाद (सर्टिफिकेट) दाख़िल करने होंगे। उन्हों ने बताया कि दरख़ास्त गुज़ार की मुद्दत मुलाज़मत कम अज़ कम पाँच बरस होनी चाहीए। उन्हों ने गुज़श्ता दिनों एहया(फिर से आगाज)–करदा स्कीम बराए मुसव्विदात-ओ-इशाअत कुतुब के मुताल्लिक़ बताया कि ताहाल उर्दू एकेडेमी को 48 दरख़्वास्तें मौसूल हुई(मिली) हैं।

इलावा अज़ीं (इसके इलावा)इस स्कीम में दरख़ास्त के इदख़ाल के लिए तारीख में तौसीअ का मुतालिबा किया जा रहा है जिस पर उर्दू एकेडेमी ग़ौर कर रही है। डाक्टर एस ए शकूर ने बताया कि बेस्ट उर्दू असातिज़ा (टीचर) के लिए दरख़ास्त फ़ार्म उर्दू एकेडेमी के तमाम अहम मराकिज़ के इलावा डी एम डब्ल्यू ओ दफ़ातिर पर दस्तयाब हैं। एकेडेमी से साबिक़ में एवार्ड हासिल करने वाले असातिज़ा (टीचर) एवार्ड के लिए अहल नहीं होंगे।

दरख़ास्त गुज़ार को चाहीए कि 30 जून से क़ब्ल रास्त या बज़रीया पोस्ट एकेडेमी के दफ़्तर पर दरख़्वास्तें मआ ज़रूरी असनादात (सर्टिफिकेट)रवाना करें। प्रेस कान्फ़्रैंस के मौक़ा पर मिस्टर शेख जाफ़र, मिस्टर वे कृष्णा के इलावा जनाब अरशद मुबीन ज़ुबैरी मौजूद थे।

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