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उर्दू का तहफ़्फ़ुज़ हुकूमतें नहीं उर्दू बोलने वाले करें

हैदराबाद 10 अगस्त: ज़ाहिद अली ख़ान एडीटर रोज़नामा सियासत ने कहा कि नामवर मज़ाह निगार मुजतबा हुसैन ने अपनी ग़ैरमामूली सलाहीयतों और मज़ाह निगारी के ज़रीये आलमगीर सतह पर मक़बूलियत हासिल की।

उन्होंने अपने मज़ामीन के ज़रीये सैंकड़ों म्दाहों को मसर्रत और बसीरत से माला-माल किया है। ज़ाहिद अली ख़ान महबूब हुसैन जिगर हाल में इदारा सियासत के ज़ेरे एहतेमाम पदम-श्री डॉ मुजतबा हुसैन की तख़लीक़ात पर मुश्तमिल वैब साईट की इफ़्तिताही तक़रीब को ख़िताब कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि मुजतबा हुसैन ने 12 अगस्त 1962 से सियासत में पहला कालम लिख कर मज़ाह निगारी का आग़ाज़ क्या उसके बाद उनके बेशुमार मज़ामीन ख़ाके और इंटरव्यूज़ हिन्दुस्तान-ओ-पाकिस्तान के अलावा अमरीका लंदन और दुसरे मुल्कों से शाय होने-ओ-अले अख़बारात-ओ-रसाइल मींशाइअ होते रहे।

उर्दू का शायद ही कोई अदीब है जिसने इस क़दर तख़लीक़ात उर्दू दुनिया को दी हैं। ज़ाहिद अली ख़ान ने सियासत के तैयारा करदा इस वैब साईट का ज़िक्र करते हुए कहा कि इदारा सियासत ने अपने नामवर अदीब को ख़िराज-ए-तहिसीन अदा करने की कोशिश की है।

उन्होंने कहा कि सियासत की तरफ से एक एसा वैब साईट तैयार करने का मन्सूबा है जो 1947 से आज तक सियासत में शाय शूदा पसंदीदा और मुंतख़ब मज़ामीन पर मुश्तमिल होगाता के क़ारईन के सियासी समाजी मसाइल से वाक़फ़ीयत हासिल हो सके।

ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि इस वक़्त 170 ममालिक में अख़बार सियासत के क़ारईन इंटरनेट के ज़रीये अख़बार का मुताला करते हैं। उन्होंने कहा कि आज की इस तक़रीब में ज़िंदगी के तमाम शोबों की नुमाइंदा शख़्सियतें शिरकत कर रही हैं इस से मुजतबा हुसैन की मक़बूलियत का अंदाज़ा होता है।

उन्होंने उर्दू वालों को मश्वरह दिया कि वो इस ज़बान का तहफ़्फ़ुज़ करें जिस तरह हम अपनी माँ से मुहब्बत करते हैं इसी तरह अपनी माँ की तरफ से भी मुहब्बत रखनी चाहीए हुकूमतें ज़बान का तहफ़्फ़ुज़ नहीं कर सकती बल्कि ज़बान बोलने वाले ही उसके तहफ़्फ़ुज़ का हक़ अदा कर सकते हैं।

ज़हीरुद्दीन अली ख़ान मैनेजिंग एडीटर सियासत के फ़र्ज़ंद असग़र अली ख़ान चीफ़ डीज़ाइनर ने बटन दबा कर वैब साईट का इफ़्तेताह किया। वाज़िह रहे कि पिछ्ले 4 बरस से इस वैब साईट की तैयारी के सिलसिले में असग़र अली ख़ान के अलावा मुहम्मद तक़ी अबदुलशकूर मास कंप्यूटर्स और दूसरों ने शबाना रोज़ मेहनत की 6500 सफ़हात और 400 से ज़ाइद फ़ोटोज़ पर मुश्तमिल इस वैब साईट के ज़रीये मुजतबा हुसैन के फ़न और शख़्सियत का भरपूर मुताला किया जा सकता है। मुजतबा हुसैन ने इस मौके पर अपना ख़ुसूसी मज़मून लू आज हम भी साहिब वैब साईट हो गए सुनाया और ख़ूब दाद तहसीन हासिल की। उन्होंने निहायत जज़बाती अंदाज़ में कहा कि सियासत से उनका रिश्ता गहिरा और अटूट रहा है।

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