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उर्दू को फ़रोग़ देने ऐक्शन प्लान की ज़रूरत

उर्दू के स्कालरों, दानिश्वरों, मुसन्निफ़ीन और दीगर अदीब-ओ-माहिरीन ने हिंदुस्तान में फ़रोग़े उर्दू के लिए जामे ऐक्शन प्लान बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

उर्दू के स्कालरों, दानिश्वरों, मुसन्निफ़ीन और दीगर अदीब-ओ-माहिरीन ने हिंदुस्तान में फ़रोग़े उर्दू के लिए जामे ऐक्शन प्लान बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

दुनिया भर से ताल्लुक़ रखने वाले उर्दू के दानिशवरान व मुफ़क्किरीन(विद्वान और चिंतक) ने कहा कि उर्दू ज़बान को तरक़्क़ी देने और इसका हक़ दिलाने के लिए अहल-ए-ज़बान को आगे आने की ज़रूरत है। नामवर मुफ़क्किरे उर्दू सय्यद मुहम्मद अशरफ़ ने कहा कि उर्दू में इब्तिदाई और सानवी तालीम को मुस्तहकम बनाना निहायत ही ज़रूरी है। तालीमी इदारों मदरसों और उर्दू सहाफ़त को इस ज़बान की तरक़्क़ी-ओ-तरवीज में अनथक मेहनत करनी होगी। दरहक़ीक़त उर्दू की तरक़्क़ी के लिए अब तक कोई ख़ास क़दम नहीं उठाया गया। नई दिल्ली में विज़ारत फ़रोग़े इंसानी वसाइल के तहत ख़ुदमुख़तार रेगूलेटरी इदारा क़ौमी कौंसल बराए फ़रोग़े उर्दू ज़बान की जानिब से मुनाक़िदा पहली तीन रोज़ा आलमी उर्दू कान्फ़्रेंस से ख़िताब करते हुए सय्यद मुहम्मद अशरफ़ ने कहा था कि उर्दू को फ़रोग़ देने के लिए कोई कोताही नहीं होनी चाहीए।

इस कान्फ़्रेंस में हिंदुस्तान के बशमोल मुख़्तलिफ़ ममालिक से दानिश्वरों ने शिरकत की और उर्दू ज़बान की जानिब तवज्जो देने में कोताही से मुताल्लिक़ अपनी तशवीश का इज़हार क्या। उर्दू ज़बान इस मुल्क के सेक्यूलर ताने बाने को मज़बूत बनाने का अहम ज़रिया है । पंजाब यूनीवर्सिटी लाहौर पाकिस्तान में शोबा-ए-उर्दू के साबिक़ साबिक़ चेयरमेन तहसीन फ़ारूक़ी ने कहा कि उर्दू के लिए बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। अगरचे कि टेक्नोलोजी से मरबूत करने कई इक़दामात किए गए हैं । इस ज़बान को रोज़गार से मरबूत करने की भी कोशिश की जानी चाहीए। उर्दू को रोज़गार से मरबूत किया गया तो ही इस ज़बान को फ़रोग़ देने में अहम ज़रिया होगा। दानिशवाराने उर्दू ने ये भी कहा कि उर्दू को तरक़्क़ी देने के लिए ठोस मंसूबा बनाने के इलावा इस पर पूरी दियानतदारी से अमल आवरी ज़रूरी है।

जवाहरलाल नहरू यूनीवर्सिटी के प्रोफ़ेसर ख़्वाजा इकरामुद्दीन ने कहा कि ज़बान तमाम रुकावटों को दूर करने का ज़रिया होती है। उर्दू भी दीगर ज़बान बोलने वाले अवाम से राबिता के लिए एक अहम ज़रिया है। सारी दुनिया में उर्दू बोली लिखी और पढ़ी जाती है। अवाम के अंदर उर्दू की चाशनी और उस की कशिश बरक़रार है। ये ज़बान हर फ़र्द की पसंदीदा ज़बान है और हर फ़र्द को इस के फ़रोग़ के लिए भरपूर हिस्सा अदा करना होगा।

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