Saturday , October 21 2017
Home / Hyderabad News / उर्दू यूनीवर्सिटी चांसलर मुहम्मद मियां ने मंदिर में पूजा की

उर्दू यूनीवर्सिटी चांसलर मुहम्मद मियां ने मंदिर में पूजा की

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी जो कि मजमूई एतेबार से एक उर्दू इदारा है और इस में मुसलमानों की अक्सरीयत है, मगर हालिया अर्सा में इस के आला ओहदों पर एसे अफ़राद तक़र्रुर हासिल करने में कामयाब हुए हैं, जिन के मज़हबी रुजहानात बिलकुल

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी जो कि मजमूई एतेबार से एक उर्दू इदारा है और इस में मुसलमानों की अक्सरीयत है, मगर हालिया अर्सा में इस के आला ओहदों पर एसे अफ़राद तक़र्रुर हासिल करने में कामयाब हुए हैं, जिन के मज़हबी रुजहानात बिलकुल्लिया तौर पर बातिल हैं।

वाइस चांसलर उर्दू यूनीवर्सिटी मुहम्मद मियां के मज़हबी ख़्यालात पर मुतअद्दिद मर्तबा सवालात उठाए जा चुके हैं, इस के बावजूद उनके तर्ज़ में कोई तबदीली रोनुमा नहीं हुई और ये इंतिहाई अहम क़ौमी दानिश गाह बद मज़ाहिब और अक़ाइद बातिला से ताल्लुक़ रखने वालों की आमाजगाह बनने के ख़दशात पैदा हो गए हैं।

मुहम्मद मियां जिन के नाम के एतेबार से ये तसव्वुर किया जाता हैके ये एक रासिख़ उल-अक़ीदा मुस्लमान हैं, लेकिन उनकी हरकात से मुस्लिम समाज शर्मिंदा हो रहा है।

त्ंडोर के एक मंदिर में मुहम्मद मियां ने बाज़ाबता तौर पर पूजा की और इस के बाद अपने ख़िताब के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों में पूजा से उन्हें कलबी सुकून हासिल होता है।

मुहम्मद मियां के ये अलफ़ाज़ कोई नई बात नहीं है, लेकिन इन का ये बरमला इज़हार पहली मर्तबा मंज़रे आम पर आया है। उनके मुताल्लिक़ यूनीवर्सिटी के ज़िम्मेदारों का इबतिदा ही से ये कहना हैके वो एक मज़हब बेज़ार शख़्सियत के हामिल हैं और बाज़ मर्तबा उन के ख़ानगी मुआमलात के मुताल्लिक़ भी यूनीवर्सिटी के ओहदेदारों ने इज़हार-ए-ख़्याल किया, मगर ये सोचते हुए अब तक उनके इस तरह के नज़रियात पर ख़ामोशी इख़तियार की जाती रही कि मज़हब इन का ज़ाती मुआमला है, लेकिन एक आला ओहदे पर फ़ाइज़ मुस्लिम नाम रखने वाले ओहदेदार की तरफ से इस तरह के इज़हार से कई ख़दशात रोनुमा हो रहे हैं। साबिक़ में सालार जंग म्यूज़ीयम में मुनाक़िदा एक तक़रीब से ख़िताब के दौरान भी मुहम्मद मियां ने बुर्क़ा को तंज़ का निशाना बनाया था और उन्हें मुसलमानों की सख़्त तन्क़ीदों का सामना करना पड़ा था, लेकिन बादअज़ां उन्होंने अपने ख़्यालात को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का इल्ज़ाम आइद करते हुए उस की तरदीद करने में अपनी आफ़ियत महसूस की, लेकिन त्ंडोर के मंदिर में किए गए उनके इस अमल का कोई जवाज़ मौजूद नहीं है।

उन्होंने दावा किया हैके देवी देवताओं के दर्शन से उन्हें ज़हनी सुकून मिलता है। मुहम्मद मियां का ये अमल शायद किसी शख़्सियत या हुकूमत को ख़ुश करने के लिए होगा, लेकिन उनके इस अमल से ये बात खुल कर सामने आचुकी हैके मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी अब महफ़ूज़ हाथों में नहीं है।

TOPPOPULARRECENT