Friday , October 20 2017
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उर्दू लेखकों को यह साबित करना होगा कि बुक में देश और सरकार के खिलाफ कुछ नहीं है

नई दिल्ली।दि नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज (NCPUL) ने एक ऐसा फार्म पेश किया है, जिसमें लेखकों को हर साल यह साबित करना होगा कि उनकी किताब की टॉपिक वस्तु में सरकार और देश के खिलाफ कुछ नहीं है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में ऐसे फार्म उर्दू लेखकों और एडिटरों  को मिले हैं, जिसमें लेखकों से कहा गया है कि वे दो गवाहों के हस्ताक्षर भी उपलब्ध कराएं। फार्म उर्दू में है। सूत्रों के अनुसार यह भी कहा गया है कि इसके ख़िलाफ़ वर्ज़ी  पर NCPUL  लेखक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और वित्तीय सहायता वापस ली जा सकती है।

उधर, पिछले साल नियुक्त हुए NCPUL के डाइरेक्टर  इंतेजा करीम कहते हैं कि यदि लेखक सरकार से आर्थिक सहायता चाहते हैं तो निश्चित रूप से कंटेंट सरकार के खिलाफ नहीं होना चाहिए। एनसीपीयूएल एक सरकारी संगठन है और हम सरकारी कर्मचारी हैं। हम स्वाभाविक रूप से सरकार का ध्यान रखेंगे। करीम कहते हैं कि यह निर्णय पिछले साल एचआरडी मंत्रालय के साथ हुई एक बैठक में लिया गया थाी। गृह मंत्रालय को भी इस बारे में सब मालुम है।

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