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उर्दू साहित्य के प्रसिद्ध हस्तियों ने किया ‘ग़ालिब यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की मांग

मेरठ: उर्दू शायरी और साहित्य के फलक पर मिर्जा असदुल्लाह खां ग़ालिब चमकता हुआ वह सितारा है, जिस के लफ्ज़ों की किरणें आज भी उर्दू शायरी की दुनिया को रोशन कर रही हैं। लंबे समय बीत जाने के बावजूद ग़ालिब अपनी शायरी और लफ्ज़ों के द्वारा आज भी हमारे दिल व दिमाग में जिंदा हैं। मिर्ज़ा ग़ालिब की जयंती के अवसर पर मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिस में देश विदेश से आये हुए साहित्यकारों ने राज्य सरकार से ग़ालिब के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की।

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यूं तो यादे ग़ालिब किसी खास दिन की मोहताज नहीं, लेकिन जयंती के अवसर पर साहित्यिक और शायरी द्वारा ग़ालिब को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है।

न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार इसी सिलसिले में मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

सीसीएस विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में ‘यह तेरा बयान ग़ालिब के शीर्षक से आयोजित कार्यक्रम में एनसीपीयूएल के पूर्व अध्यक्ष ख्वाजा इकरामुद्दीन के अलावा कनाडा से आए डॉक्टर तक़ी आब्दी और मिस्र की अल अज़हर विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर यूसुफ आमिर और डॉक्टर रानी ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की।

इस अवसर पर उर्दू साहित्य की प्रसिद्ध हस्तियों ने थीसिस पेश किया और ग़ालिब जैसी व्यक्तित्व को दुनिया के सामने पेश करने में बरती जा रही कोताही पर खेद व्यक्त किया। साहित्यकारों ने राज्य सरकार से ग़ालिब के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना की भी पुरजोर मांग की।

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