Friday , October 20 2017
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उर्दू ज़बान की तरक़्क़ी के लिए आबिद अली ख़ां एजूकेशनल ट्रस्ट की बेहतरीन ख़िदमात

आबिद अली ख़ान एजूकेशनल ट्रस्ट के ज़ेरे एहतेमाम उर्दू दानी ज़बान दानी और इंशा के इमतेहानात में तक़रीबन 11हज़ार उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया।

आबिद अली ख़ान एजूकेशनल ट्रस्ट के ज़ेरे एहतेमाम उर्दू दानी ज़बान दानी और इंशा के इमतेहानात में तक़रीबन 11हज़ार उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया।

हैदराबाद सकनदराबाद में 136 मराकज़ पर इमतेहानात का इनइक़ाद अमल में आया आंध्र प्रदेश के मुख़्तलिफ़ अज़ला में 79 मराकज़ में इमतेहानात मुनाक़िद हुए।

मुल्क के दुसरे रियास्तों में 9 मराकज़ क़ायम किए गए जहां पर इन इमतेहानात में उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। आबिद अली ख़ान एजूकेशनल ट्रस्ट के ज़ेरे एहतेमाम मुनाक़िद होने वाले इन इमतेहानात के मराकज़ का मुख़्तलिफ़ अदबी-ओ-इलमी शख़्सियतों ने मुआइना करते हुए उम्मीदवारों की हौसलाअफ़्ज़ाई की और आबिद अली ख़ान एजूकेशनल ट्रस्ट की उर्दू के लिए की जाने वाली इस ख़िदमत को उर्दू की तरक़्क़ी में अहम पेशरफ़त क़रार दिया।

आमिर अली ख़ान न्यूज़ ऐडीटर सियासत ने इमतेहानी मराकज़ का मुआइना करते हुए उम्मीदवारों में मौजूद दिलचस्पी को ख़ुश आइंद क़रार देते हुए कहा कि उर्दू से नौजवान नसल में दिलचस्पी उर्दू की बक़ा की ज़ामिन है लेकिन उर्दू ज़बान को इस के जायज़ मुक़ाम के लिए अपनी कोशिशें करनी पड़ रही है जिस की बुनियादी वजह उर्दू से बेएतिनाई साबित होरही है।

आमिर ख़ान ने बताया कि आबिद अली ख़ान एजूकेशनल ट्रस्ट की तरफ से इमतेहानात का इनइक़ाद उर्दू के मुस्तक़बिल को ताबनाक बनाने और इस शीरीं ज़बान से दिलचस्पी पैदा करने के लिए अमल में लाया जाता है ताकि आइन्दा नसलें उर्दू की शीरीनी से महरूम ना होने पाए।

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