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उसमान अली पाशा ने शादी के दिन ही 128 किलो सोना और एक लाख रुपये नक़्द महर अदा किया था

हैदराबाद दक्कन के हुक्मरानों को हमेशा से ही ना सिर्फ़ हिंदुस्तान बल्कि सारी दुनिया में अफ़्सानवी हैसियत हासिल रही और उन हुक्मरानों में सब से ज़्यादा चर्चे निज़ाम शशम नवाब मीर महबूब अली ख़ान बहादुर और उन के फ़र्ज़ंद आसिफ़ साबह नवाब म

हैदराबाद दक्कन के हुक्मरानों को हमेशा से ही ना सिर्फ़ हिंदुस्तान बल्कि सारी दुनिया में अफ़्सानवी हैसियत हासिल रही और उन हुक्मरानों में सब से ज़्यादा चर्चे निज़ाम शशम नवाब मीर महबूब अली ख़ान बहादुर और उन के फ़र्ज़ंद आसिफ़ साबह नवाब मीर उसमान अली ख़ान बहादुर के रहे। हैदराबाद दक्कन के इंडियन यूनीयन में शामिल किए जाने के तक़रीबन 65 साल बाद भी दुनिया में हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ान के बारे में मुख़्तलिफ़ कहानियां सुनने में आती हैं।

नवाब मीर उसमान अली ख़ान के हर अमल को एक अफ़्सानवी हैसियत ही दी जाती रही चाहे उन की रोल्स राईस गाड़ी हो या हीरे जवाहरात से मुज़ैय्यिन चीजें , उन का सीधा सादा लिबास हो या फिर वो जूतियां जिन के तलवों में ज़रो जवाहर जड़े हुए थे ग़रज़ हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ान आज़ादी से क़ब्ल भी एक अफ़्सानवी शख्सियत थे और आज के जम्हूरी दौर में उन की वही हैसियत और मर्तबा क़ायम है।

हिंदुस्तान और दुनिया के मुख़्तलिफ़ ममालिक में उन की निजी ज़िंदगी और दौलत के बारे में बहुत कुछ लिखा गया और लिखा जा रहा है। लेकिन उन की पहली शादी के बारे में बहुत कम लोग वाक़िफ़ हैं।

आप को बतादें कि हमारी नई नस्ल टी वी सीरीयल्स में ही शहज़ादों और शहज़ादियों की शादियों की तक़ारीब के मनाज़िर देख कर हैरत में पड़ जाते हैं लेकिन हिंदुस्तान की 562 से ज़ाइद देसी रियासतों में सब से दौलतमंद तरीन रियासत हैदराबाद दक्कन में 19 सफ़र मुताबिक़ 1324 हिज्री (1906) ऐसा दिन था जब सारी ममलकत में ख़ुशीयां मनाई जा रही थीं शाही महलात को इंतिहाई सलीका से सजाया गया था।

सारा माहौल मुअत्तर हो चुका था जाबजा शहनाइयाँ बजाई जा रही थीं। गरीबों में ख़ैरात बट रही थी , उमरा को एज़ाज़ात अता किए जा रहे थे। दरअसल उस दिन आसिफ़ जाह शशम नवाब मीर महबूब अली ख़ान बहादुर के 22 साला फ़र्ज़ंद दिलबन्द नवाब मीर उसमान अली ख़ान बहादुर की शादी हो रही थी। 1906 में हुई इस शादी में हिंदुस्तान की मुख़्तलिफ़ देसी रियासतों के नवाब राजा रजवाड़ और मोअज़्ज़िज़ीन शरीक थे।

नवाब जहांगीर जंग बहादुर की 16 साला दुख़्तर आज़िमुन्निसा बेगम के साथ नवाब मीर उसमान अली ख़ान के निकाह के मौक़ा पर मेहमानों ने सब से पहले महर की रक़म के बारे में जानने की कोशिश की। तो मालूम हुआ कि शादी के दिन ही 128 किलो सोना और एक लाख रुपये अता की।

हुज़ूर निज़ाम की शादी और महर के बारे में जान कर इस बात का अंदाज़ा होता है कि हैदराबाद दक्कन में महर की शादी के दिन ही अदाएगी का रिवाज था लेकिन आज ऐसा लगता है कि मस्जिद में अक़्द जोड़े की रक़म नक़्द लेकिन महर उधार का रुजहान चल पड़ा है।

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