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एक आम मुसलमान और एक आम हिन्दू में कोई फर्क नहीं है: जावेद अख्तर

कट्टरपंथ, कट्टरवाद और इस्लामोफोबिया के आसपास घूमते एक विषय पर बात करते हुए, प्रसिद्ध कवि और गीतकार जावेद अख्तर ने शुक्रवार को कहा कि एक औसत हिंदू और औसत मुस्लिम की सोच और जीवन के तरीके में कोई विभाजन नहीं है, इनके बीच धार्मिक आधार पर विभाजन को समाज ने थोपा है।

“एक औसत मुस्लिम सिर्फ एक औसत हिंदू की तरह है। हर समुदाय सौम्य भागों में बंटा होता है, उन्हें अपनी भाषा, धर्म या समुदाय दूसरों की तुलना में अधिक पसंद होता है, “अख्तर ने टाटा स्टील कोलकाता साहित्य एक सत्र में कहा।

“लेकिन एक औसत मुसलमान कभी भी किसी दूसरे धर्म के अनुयायी को नहीं मारना चाहेगा, ठीक इसी तरह एक औसत हिंदू भी नहीं चाहेगा” उन्होंने जोर देकर कहा।

उन्होंने हिन्दू और मुसलमानों के बीच मौजूद समानताओं पर भी बातें रखी।

“निकाह और फेरे की रस्मों के अलावा अगर देखा जाए तो हिन्दू और मुसलमानों की शादियों में भी बहुत सारी समानताएं हैं। बंगाल और पंजाब में विभाजन की त्रासदी हुयी जहां के निवासी दो अलग अलग धर्मों से होने के बावजूद बेहद समान थे, “उन्होंने कहा।

इस विभाजन के लिए साम्प्रदायिक शक्तियों को जिम्मेदार ठहराते हुए अख्तर ने कहा कि आम आदमी सांप्रदायिक सद्भाव में फलता-पनपता है, जबकि साम्प्रदायिक शक्तियां अव्यवस्था में पनपती है। “सांप्रदायिक लोग आपको हमेशा एक युद्ध क्षेत्र में रखने की कोशिश करेंगे। वह कैसे अपने शुभचिंतक हो सकता है? ”

मुसलमानों के खिलाफ दुनिया भर में अविश्वास में वृद्धि के बारे में बताते हुए अख्तर ने कहा, “त्रासदी यह है कि अल्पसंख्यक समुदाय समुदाय को उसके सबसे बुरे व्यक्ति को देख कर पहचाना जाता है जबकि बहुसंख्यक समुदाय को उन के बीच में सबसे अच्छे व्यक्ति द्वारा पहचाना जाता है”।

“क्या कोई कल्पना में भी, नाथूराम गोडसे के साथ भारत के बड़े हिंदू समुदाय की पहचान करेगा। बेशक नहीं। लेकिन भारत में 17-18 करोड़ मुसलमानों को सभी दाऊद इब्राहिम के साथ पहचान रहे हैं। यह कट्टरता और गलत अवधारणा का उदाहरण है, “उन्होंने कहा।

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