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एक को सज़ाए मौत और एक को ज़िंदगी ?

नई दिल्ली, 05 दिसंबर: (पी टी आई) सदर जम्हूरिया प्रणब मुखर्जी ने ही क़साब की रह‌म की दरख़ास्त को नामंज़ूर किया था और बिलआख़िर क़साब को फांसी पर लटका दिया गया था, लेकिन अब सदर जम्हूरिया ने एक ऐसे क़ैदी को जिसे सज़ाए मौत दी जाने वाली थी, उसकी स

नई दिल्ली, 05 दिसंबर: (पी टी आई) सदर जम्हूरिया प्रणब मुखर्जी ने ही क़साब की रह‌म की दरख़ास्त को नामंज़ूर किया था और बिलआख़िर क़साब को फांसी पर लटका दिया गया था, लेकिन अब सदर जम्हूरिया ने एक ऐसे क़ैदी को जिसे सज़ाए मौत दी जाने वाली थी, उसकी सज़ा को उम्र क़ैद में तबदील कर दिया है। ।

मुल्ज़िम का नाम अतबीर है जिसे 2004 में एक सेशन अदालत ने सज़ाए मौत सुनाई थी, जिसने अपनी सौतेली माँ, सौतेले भाई और सौतेली बहन का जायदाद के एक तनाज़ा में 1996 में क़त्ल कर दिया था। सज़ा ए मौत अगस्त 2010 में हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों की जानिब से बरक़रार रखी गई थी , लेकिन जारिया साल जून में वज़ारत-ए-दाख़िला ने सदर जम्हूरिया से दरख़ास्त की थी कि सज़ा ए मौत को सज़ा ए उम्र क़ैद में तबदील कर दिया जाए और इस तरह प्रणब मुखर्जी ने भी बगै़र किसी ताख़ीर के 15 नवंबर को अतबीर की सज़ाए मौत को सज़ा ए उम्र कैद में तबदील कर दिया।

ये तमाम तफ़सीलात सदर जम्हूरिया की सरकारी वेब साईट पर सज़ा ए मौत पाने वाले मुजरिमीन की जानिब से रहम की दरख़ास्तों के मौक़िफ़ का मुताला करने के बाद हासिल हुआ। यहां इस बात का तज़किरा एक बार फिर ज़रूरी है कि 5 नवंबर को सदर जम्हूरिया ने अजमल क़साब की रहम की दरख़ास्त को मुस्तर्द कर दिया था, जिसे गुज़शता साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने सज़ाए मौत सुनाई थी। राष्ट्रपति भवन से जारी एक बयान के मुताबिक़ प्रणब मुखर्जी ने रहम की दरख़ास्तों को दुबारा ग़ौर-ओ-ख़ौज़ के लिए वज़ारत उमूर दाख़िला को रवाना किया था, जिन में अफ़ज़ल गुरु की दरख़ास्त रहम भी शामिल थी।

लिहाज़ा उन आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ सदर जमहूरिया के पास रहम की सिर्फ़ एक दरख़ास्त ज़ेर-ए-इलतिवा है और मुल्ज़िम साइबना निन्गप्पा नाटेकर (Saibanna Ningappa Natikar) की जानिब से दाख़िल की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में नाटेकर की सज़ाए मौत को बरक़रार रखा था।

नाटेकर ने अपनी बीवी और बेटी का क़त्ल कर दिया था। वज़ारत ए उमूर दाख़िला ने 5 नवंबर को अपनी सिफ़ारिशात सदर जम्हूरिया के सेक्रेट्रेट को क़तई फ़ैसला के लिए रवाना किया था। इस तरह अब प्रण्ब मुखर्जी ने 1-1 का स्कोर कर लिया है यानी एक को सज़ाए मौत और एक को ज़िंदगी ?

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