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एक छोटी सी चिंगारी कभी भी आग लगा सकती है

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श्रीनगर: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ। फारूक अब्दुल्ला ने दोनों पड़ोसियों के राजनीतिक नेतृत्व को सलाह दी है कि वे शब्दों युद्ध और भड़काऊ बयानबाजी से परहेज करे, क्योंकि बकौल उनके एक छोटे से चिंगारी कभी भी आग लगा सकती है और परमाणु शक्तियों युक्त दोनों देशों के बीच नबरदआज़माई किसी बड़े खतरे का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान बातचीत की प्रक्रिया को ठंडे बक्से में डाल उपमहाद्वीप की शांति और समृद्धि को दांव पर नहीं लगा सकते। उनका कहना था कि नेशनल कांफ्रेंस कश्मीर समस्या के राजनीतिक समाधान के लिए संघर्ष जारी रखेगी और इसी समाधान पर जोर देती रहेगी जो पहले यहां के तीनों क्षेत्रों के लोगों और को स्वीकार्य हो। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने जिन शर्तों पर भारत के अधीन विलय किया था अगर नई दिल्ली ने संबद्ध इसी हेत को पहले ही बहाल किया होता तो कश्मीर के ख़रमन शांति बार बार आग नहीं लगती।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भारत और पाकिस्तान को सभी मुद्दों शांतिपूर्ण हल करने की अपील का स्वागत करते हुए डॉ। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सीमा पर युद्ध बंद उल्लंघन को राजनीतिक रंग देना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ व्यापक और सार्थक बातचीत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसके अलावा दोनों पड़ोसियों के बीच सभी विवादास्पद मुद्दों का समाधान ढूंढ निकालने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि आम सहमति करके तदब्बुर किया जाए। डॉक्टर फारूक ने कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व से अपील करता हूं कि दुश्मनी का त्याग करके सुलह और वार्ता की डगर पर आए ‘। उनका कहना था कि सीमा के दोनों तरफ से हो रहा मानव जीवन का ज़याँ किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक मानव जान कीमती है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को एक दूसरे की भावनाओं और भावनाओं की कदर कर बातचीत की प्रक्रिया फिर से शुरू करना चाहिए। क्योंकि पड़ोसियों के साथ किसी भी तरह की प्रतिद्वंद्विता उपयोगी नहीं होती, भारत के राजनीतिक नेताओं ने बार बार कहा कि ‘दोस्त बदले जा सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं।’ समय कातकाज़ा है कि अब इसे लागू कर पड़ोसियों के साथ स्थायी शांति और दोस्ती स्थापित किया .इस बीच नेशनल कांफ्रेंस ने नादी हिल रफी बसे बारामूला में 22 साल वसीम नजीर लोन की मौत पर गंभीर पीड़ा व्यक्त करते हुए सेना की इस कार्रवाई गंभीर शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि स्थानीय आबादी के अनुसार महलूक वसीम अपने खेत में काम कर रहा था कि वहां से कार में गुजर रहे सैन्य कर्मियों ने फायरिंग कर दी जिससे वसीम नजीर बरसर मौक़ा हलाक होगया.ास प्रकार के कृत्यों को जानबूझकर ख़रमन शांति आग लगाने की सुनियोजित साजिश करार देते हुए जावेद डार ने कहा कि इसमें शामिल अधिकारियों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए जो दूसरों के लिए निवारक उपकरण हो।

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