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एक साल में मुसलमान आम आदमी पार्टी से ऊबे

नई दिल्ली – एक साल पहले अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को असेंबली इंतेख़ाब में मुस्लिम ने हाथोंहाथ लिया था .लेकिन अब उनको आप और दूसरी पार्टी में कोई फ़र्क नहीं नज़र आया रहा है .

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कई एलुमनी ,स्टूडेंट्स और दानिश्वर ने बहुत सी उम्मीदों के साथ आप की हिमायत की थी .ज़्यादातर ने आप को बीजेपी और कांग्रेस बता के छोड़ दिया है .

2011 सेन्सस के आकड़ो में दिल्ली में मुस्लिम आबादी 12 फ़ीसद है .CSDS सर्वे के हिसाब से 2013 के असेंबली इलेक्शन में 53 फ़ीसद मुस्लिम ने कांग्रेस की हिमायत की थी .कांग्रेस को सिर्फ़ मुस्लिम अक्सरियत की 4 सीट्स पे जीत मिली थी

लेकिन उसके बाद हुये इलेक्शन में नज़ारा बदल गया ,मुसलमानों ने इस बार आप को हाथोंहाथ लिया ,77 फ़ीसद मुस्लिम ने पार्टी की हिमायत की .

लेकिन अब मुस्लिमो की शिकायत है कि मुस्लिम वोट लेने के बाद आप ने मुस्लिम को ना ही हुकुमत में और ना ही पार्टी कोई तवज्जो दी है .

आप के रुकूँन इलियास आज़मी का कहना है पार्टी के बीस स्पोकेपेर्सन में मैं अकेला मुस्लिम हु ये मुस्लिमो के लिए पार्टी के दोहरे नजरिये को साबित करता है .

आप वालंटियर्स जो कि पद ,रहने के लिए रिहाइश और अच्छी सैलरी सब पा रहे है उसमे भी मुस्लिम ना के बराबर है .कोई मुस्लिम आप MLA मिनिस्टर्स का पर्लिंमेंटरी सेसरेटरी नही है .सीएम ,डिप्टी सीएम और मिनिस्टर्स ने भी किसी मुस्लिम कंसल्टेंट्स को अपने लिए नही नियुक्त किया है

170 वकीलों में सिर्फ़ एक मुस्लिम को जगह मिली है ,29,444 टीचर्स की पोस्ट में सिर्फ़ 262 उर्दू टीचर के लिए निकाली गयी जिसमे से सिर्फ़ 72 पे नियुक्ती हुई .

आजमी ने कहा “आप ने हमारी भावनाओ से खेला है ,उनको सिर्फ़ हमारे वोट सत्ता के लिए चाहिये थे ”

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