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एक ज़ियाउल यूपी में मार जा चुका है, दूसरे की बलि मध्य प्रदेश में चढ़ने वाली है

 

मध्यप्रदेश के बालाघाट ज़िले में संघ के ज़िला प्रचारक सुरेश यादव पर कार्रवाई का खामियाजा इलाके के पुलिस अफसरो को उठाना पड़ रहा है। संघ प्रचारक सुरेश यादव पर कार्रवायी का भुगतान मध्यप्रदेश पुलिस को अपने ही विभाग के चार पुलिस अफ़सरों और चार कान्सटेबलों पर उन्हीं के थाने में लूट, बलवा और हत्या की कोशिश जैसी सात गंभीर धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर चुकाना पड़ रहा है।बालाघाट ज़िले के थाना इंचार्ज जियाउल हक संघ के नेता पर कार्यवायी के फलस्वरुप उन्हें परेशान किया जा रहा है। स्थानीय मीडिया जियाउल हक के धर्म के आधार पर निशाना बना रही है उन्हें पाकिस्तानी और तालिबानी तक कहा जा रहा है। अपने खिलाफ इस तरह की कार्यवायी के बाद जियाउल हक लापता हैं।

संघ प्रचारक सुरेश यादव वाट्सएप ग्रुप में पैंगबर मोहम्मद जुड़ी भड़काऊ बातें पोस्ट कर रहे थे।

संघ प्रचारक सुरेश यादव एक वाट्सएप ग्रुप के जरिये इस्लाम और पैगंबर से जुड़ी भड़काऊ बातें पोस्ट कर रहे थे। स्थानीय मीडियाकर्मियों का ‘ओएनआई न्यूज़ वनांचल’ के नाम से एक वाट्सएप ग्रुप में पैंगबर मोहम्मद आपत्तिजनक बाते सुरेश यादव बार बार डाले जा रहे थे। मध्यप्रदेश पुलिस के एक अफ़सर के मुताबिक संघ प्रचारक सुरेश यादव ने इस ग्रुप में 24 सितंबर को इस्लाम और पैगंबर से जुड़ी भड़काऊ बातें पोस्ट करना शुरु किया था। ग्रुप में मौजूद नवाब ख़ान नाम के एक युवक ने विरोध किया और 25 सितंबर की शाम बैहर पुलिस थाने जाकर लिखित शिक़ायत कर दी।

त्योहारी मौसम में माहौल खराब होने की आशंका को देखते हुए एक मुस्लिम अफसर ने सुरेश यादव पर फौरन कार्यवायी की

इस थाने के इंचार्ज एक मुसलमान अफ़सर ज़ियाउल हक़ थे। ज़ियाउल हक़ ने इस शिक़ायत की जानकारी अपने सरकारी फ़ोन से एसपी बालाघाट डॉक्टर असित यादव को उसी वक़्त दी। गणेश चतुर्थी और नवरात्र जैसे त्योहारी मौसम में ऐसे भड़काऊ कंटेंट की वजह से हो सकने वाले तनाव के मद्देनजर प्रशासन चौकन्ना हो गया। रात 8 बजे के क़रीब एडिशनल एसपी राजेश शर्मा, थाना इंचार्ज ज़ियाउल हक़, सब इंस्पेक्टर अनिल अजमेरिया, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर सुरेश विजयवार और चार कॉन्सटेबल सुरेश यादव के घर पहुंचे और उन्हें थाने ले आए। बेलाघाट थाने के एक अफ़सर कहते हैं कि थाने में घुसने से पहले ही सुरेश पुलिस की गिरफ़्त से छूटकर भाग निकले। वे थाने के नज़दीक स्थित असाटी मेडिकल स्टोर में घुस गए। फिर पुलिसवालों की टीम उन्हें मेडिकल स्टोर से पकड़कर थाने लाई।तफ़्तीश में सुरेश यादव के मोबाइल में भड़काऊ कंटेंट मिलने पर उनका फ़ोन ज़ब्त किया गया है. फिर मेडिकल करवाने के बाद उनके ऊपर मुक़दमा क़ायम किया गया और गिरफ़्तारी हुई।
संघ के दबाव पर सुरेश यादव पर कार्यवायी करने वाले पुलिस अफसरों पर ही एफआइआर दर्ज की गई

सुरेश यादव की गिरफ़्तारी के तीन घंटे बाद इसी थाने में सुरेश की शिक़ायत पर बैहर थाना इंचार्ज ज़ियाउल, एडिशनल एसपी राजेश शर्मा समेत कइयों पर एफ़आईआर हो गई। इन अफसरों पर हत्या की कोशिश,लूट दंगा भड़काने जैसे संगीन मामलों की धाराएं के तहत एफआइआर दर्ज की गई। महज़ कुछ घंटे में दो एफ़आईआर दर्ज होने से पुलिसवालों को समझ आ गया कि इस कार्रवाई का आदेश ‘ऊपर’ से हुआ है और अब मामला एसपी असित यादव और आईजी दिनेश सागर के नियंत्रण से बाहर है।

दोपहर तक महाकौशल प्रांत के संघ प्रमुख प्रशांत सिंह ने प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए एडिशनल एसपी राजेश शर्मा, एसएचओ ज़ियाउल हक़ समेत सभी ‘दोषी’ पुलिसवालों की गिरफ़्तारी की मांग भी कर दी। साथ में यह भी लिखा कि ‘इस घटना की तीव्रता समझकर कार्यवाई करें अन्यथा इस असंतोष की प्रांत व्यापी प्रतिक्रिया संभावित है.’ संघ के आह्वान पर 29 सितंबर को बालाघाट ज़िला बंद करवाया गया।

स्थानीय मीडिया में भी संघ का दबाब, बेलापुर के पुलिस अफसरो की पक्ष को नहीं रिपोर्ट किया गया

इस केस में अधिकांश स्थानीय मीडिया ने एकतरफा ख़बरें छापी हैं। मध्यप्रदेश के एक अख़बार ब्लिट्ज़ टुडे ने ज़ियाउल हक़ पर लिखी गई ख़बर का हेडिंग लगाया है, ‘पाक समर्थक निकला मप्र पुलिस का अधिकारी.’। ख़बर में लिखा है कि संघ प्रचारक सुरेश यादव द्वारा फेसबुक पर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ किए गए कमेंट को आधार बनाकर थाना इंचार्ज ने उन्हें पीटकर अधमरा कर दिया।

अख़बार आगे लिखता है कि इस अधिकारी के कृत्य के बाद दुश्मन देश के हितचिंतक होने का सुबूत भी दे दिया है। राज एक्सप्रेस ने भी ज़ियाउल को तालीबानी अधिकारी लिखा है। एक अन्य अख़बार लिखता है कि ‘आरएसएस प्रचारक पर हमला करने वाले सेवा मुक्त किए जाएं.’।

पुलिस अफसर जियाउल हक के मुसलमान होने पर उनके निष्ठा को निशाना बनाया गया

ज़ियाउल हक़ को स्थानीय मीडिया उन्हें पाकिस्तानी और तालीबानी लिख रहा है। मीडिया के इस रवैये से नाराज़ ज़ियाउल के साथी अपना फेसबुक प्रोफ़ाइल काला कर लिया है जबकि कुछ ने उनकी तस्वीर लगा ली है। ज़ियाउल के एक साथी कहते हैं कि वह सांप्रदायिक तनाव फ़ैलाने के दोषी पर लगाम कसने गए थे लेकिन ख़ुद उस घृणा का शिकार हो गए और आज उन्हें अंडरग्राउंड होना पड़ रहा है।
36 साल के ज़ियाउल हक़ का चयन मध्यप्रदेश पुलिस में 2007 में हुआ था। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू अकादमी, सागर से ट्रेनिंग ली है. ट्रेनिंग में बेहतर प्रदर्शन और परेड कमांडर होने के नाते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं।

बालाघाट के एक पुलिस अफसर इस मामले पर कहते हैं कि संघ प्रचारक सुरेश यादव ने वॉट्सएप ग्रुप में भड़काऊ पोस्ट डाले थे जिसकी वजह से पुलिस ने कार्रवाई की। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों में सोशल मीडिया पर डाली जा रहीं भड़काऊ सामग्री की वजह से दंगे हो चुके हैं। ऐसे में पुलिस सुरेश यादव का कंटेंट देखने के बाद उनपर लगाम नहीं कसती तो क्या करती? लेकिन इसके बावजूद अगर पुलिस को मुजरिम ठहराया जाएगा तो कानून को हाथ में लेने वालों पर कार्यवायी और भी मुश्किल होती जाएगी।

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