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एथेंस के मुसलमान कर रहे हैं मस्जिद के लिए दुआ

पिरायूस में एक तहखाने में ईद की नमाज़ अदा करते मुसलमान

एथेंस, ग्रीस: इलुओपोली के अपने मध्यम वर्गीय पड़ोस में एक कैफेटेरिया में बैठी, 43 वर्षीय अन्ना स्तामोऊ कहती हैं कि उन्हें उम्मीद है कि वह जल्द ही एथेंस की नई मस्जिद में अपने परिवार के साथ इबादत के लिए जा सकेंगी।

“मैं युद्ध में फंसे हुए बच्चों के लिए दुआ करुँगी – और दुआ करुँगी कि सभी युद्ध ख़तम हो जायें, ” एथेंस में रहने वाली दो बच्चों की माँ और पीआर सलाहकार स्तामोऊ कहती हैं। कुछ साल पहले ही इस्लाम को अपनाने वाली स्तामोऊ आगे कहती हैं, “मैं अभी भी रोज़ाना अमन के लिए इबादत करती हूँ और मस्जिद में इबादत करने से मेरी दुआ जल्दी क़ुबूल होगी।”

वर्षों तक पुराने गोदामों और बेसमेंट में इबादत करने के बाद, एथेंस के मुसलमानों को अब उम्मीद है कि अति दक्षिणपंथीयों के विरोध के बावजूद सरकार मस्जिद के निर्माण की अपनी योजना से नहीं हटेगी। एथेंस इकलौती यूरोपीय राजधानी है जहाँ अभी तक कोई मस्जिद नहीं है।

ग्रीस शुरुवाती उन्नीसवीं शताब्दी तक लगभग चार शताब्दियों के लिए तुर्क शासन के अधीन था। अगर वहां मस्जिद बनती है तब वह तुर्क शासन के बाद पहली मस्जिद होगी जो राज्य के वित्त से बनेगी। इसमें 350 लोग एक साथ इबादत कर सकेंगे और यह पश्चिमी एथेंस के वोतानिकोस में एक 600 वर्ग मीटर के एक पुराने नौसेना के गोदाम की जगह बनेगी।

परिसर में एक फ़व्वारा भी लगाया जायेगा जिसकी हौज़ में लोग वुज़ू कर सकेंगे।

“यह कुछ खास नहीं किया जा रहा है,” ग्रीस की मुस्लिम एसोसिएशन के अध्यक्ष और स्तामोऊ के पति 62 वर्षीय नईम एलघंदौर का कहना है।

“लेकिन यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक आधिकारिक इमाम के साथ पहली आधिकारिक मस्जिद होने जा रही है। अब तक, इमाम स्वयंसेवक हुआ करते थे और वह थोड़ा खतरनाक था, लेकिन हम भाग्यशाली रहे हैं क्योंकि ग्रीस अभी तक कुछ भी बुरा नहीं हुआ जिससे ईसाई और मुसलमानों के संबंधों को परेशानी होती।”

कई गैर-मुस्लिम अथेनियंस इससे सहमत हैं कि एक मस्जिद का निर्माण किया जाना चाहिए।

“हम एक लोकतंत्र हैं और लोकतंत्र में धर्म की स्वतंत्रता ज़रूरी है,” प्रस्तावित मस्जिद के स्थल के निकट रहने वाले 62 वर्षीय रिटायर व्यक्ति अग्गेलिक अनाग्नोस्तोपौलो कहते हैं। ” वैसे भी मुझे क्यों चिंतित होना चाहिए? एक मुस्लिम होने के का मतलब यह नहीं है कि आप एक उग्रवादी हैं।”

ग्रीस के मुस्लिम एसोसिएशन के अनुसार, एथेंस में रहने वाले लगभग 200,000 मुसलमानों के लिए 100 से अधिक अनधिकृत मस्जिद हैं, हालांकि ज्यादातर बेसमेंट या गोदामों में बनी हुयी हैं।

 

इस इंतजार को 10 साल हो चुके है’

नई मस्जिद के निर्माण की अनुमति के लिए एक कानून 2006 में पारित किया गया था। लेकिन इसका काफी विरोध हुआ था और इसे चुनौती भी दी गई थी। अब, एक दशक तक वार्ता के बाद, स्तामोऊ और एलघंदौर को उम्मीद है कि यह लागू किया जाएगा और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को मान्यता दी जाएगी।

इस साल की शुरुआत में, सरकार ने निर्माण कंपनियों के एक संघ से मस्जिद के निर्माण के लिए एक करोड़ यूरो ($ 1.05m) की लागत का एक अनुबंध किया है। यह निर्माण कार्य अगले छह महीनों में पूरा हो जाने की उम्मीद है।

ग्रीस के एक दक्षिणपंथी समूह के मस्जिद के निर्माण को अवरुद्ध करने के लिए निर्माण स्थल पर कब्ज़ा करने और वहां बेघर लोगों के लिए आश्रय स्थल बनाने की मांग के कारण मस्जिद के निर्माण कार्य के शुरू होने में देरी हो गयी है। यह कब्ज़ा नवम्बर में ख़तम हुआ जब उस समूह को पुलिस ने गिरफ्तार किया।

कब्ज़े की घटना एथेंस के मुसलमानों के लिए नयी नहीं है क्योंकि पिछले पांच सालों में दक्षिणपंथी समूह कई बार मस्जिदों पर हमला कर चुके हैं। ऐसी ही हमले की घटना में कुछ संदिग्ध लोगों ने एक मस्जिद में इबादत कर रहे लोगों को बाहर से बंद करके आग के हवाले कर दिया था।

इस बीच, गोल्डन डॉन, संसद में सीटों के साथ एक दक्षिणपंथी पार्टी ने प्रस्तावित एथेंस मस्जिद के निर्माण स्थल पर एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया है, जो एक्रोपोलिस की विश्व विरासत स्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित है।

“यह हमारे देश को कमजोर करने के लिए एक व्यापक नीति का एक हिस्सा है,” निकोस मिचालोलिअकोस, दक्षिणपंथी पार्टी के नेता ने ग्रीक ध्वज लिए कड़ी भीड़ से कहा, भीड़ के हाथ में कुछ बैनर भी थे जिनपर अंग्रेजी में लिखा था “इस्लाम को रोको”।

जो लोग मस्जिद का विरोध कर रहे हैं उन्हें ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च में कुछ समर्थन मिल गया है।

“मेरी राय में, जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता है कि क्या उन्हें[मुस्लिम शरणार्थियों]को ग्रीस में रहने का अधिकार है तब तक निर्माण स्थगित किया जा सकता है,” ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च के प्रमुख, आर्कबिशप इएरोंय्मोस ने ग्रीक मुसलमानों और देश में रहने वाले दूसरों का उल्लेख किए बिना ग्रीक स्काई टीवी पर एक साक्षात्कार में कहा। “लेकिन अगर वे सिर्फ राहगीरों की तरह हैं, तब हमें इसकी क्या ज़रूरत है?”

आर्कबिशप इएरोंय्मोस यूरोप में मुस्लिम शरणार्थियों के आने को महाद्वीप के इस्लामीकरण करने की योजना के हिस्से के रूप में देखते हैं। “यह एक योजना का हिस्सा है। जो अच्छी तरह से लागू की जा रही है,” उन्होंने कहा।

लेकिन स्तामोऊ-एलघंदौर परिवार और अन्य हजारों ग्रीक मुसलमानों के मुताबिक, मस्जिद सभी की है, चाहे वे ग्रीक हों या न हो।

“ईश्वर का आदमी होने के बावजूद आर्कबिशप ने दक्षिण पंथ का रास्ता चुना है,” एलघंदौर कहते हैं। “बेबी यीशु क्या एक शरणार्थी नहीं थे जब उनकी मां उन्हें बचाने के लिए दूर ले गयी थी, और बाद में क्या वह बाद में एक आप्रवासी नहीं थे?”

स्तामोऊ और एलघंदौर कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश ऐसे की है कि उन्हें यह महसूस न हो की वे अपने देश में एक अल्पसंख्यक समुदाय का हिस्सा हैं। उनके बच्चे, स्कूल के घंटों के दौरान होने वाले मास में अन्य विद्यार्थियों के साथ शामिल होते हैं, हालाँकि वे ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

लेकिन जब वे वहां शामिल होते हैं तब उन्हें ऑर्थोडॉक्स ग्रीक और ग्रीक मुसलमानों में फर्क महसूस होता है। वे घर आने पर अक्सर पूछते हैं कि उनके पास इबादत के लिए पड़ोस के चर्च की तरह खूबसूरत इबादतगाह क्यों नहीं है।

“हमने तो अपनी ज़िन्दगी गोदामों और तहखानों में इबादत करके गुज़ार दी लेकिन नयी पीढ़ी इसके लिए तैयार नहीं है,” एलघंदौर कहते हैं।

वह अक्सर मुस्लिम छुट्टियों के दौरान अपने परिवार को विदेशों ले जाते है जिससे वे गरिमा के साथ इबादत कर सकें। “राज्य के लिए हम द्वितीय श्रेणी के नागरिक हैं। लेकिन मैं अपने बच्चों को इस तरह से महसूस नहीं कराना चाहता?”

स्तामोऊ को एक चिंता यह भी है कि निर्माण के बाद मस्जिद कैसी दिखेगी।

“यह ज़रूरी है कि इसका निर्माण खूबसूरत हो जिससे बच्चों को कोई फर्क महसूस न हो और वो अपने को समान समझें,” स्तामोऊ कहती हैं। “वे तहखाने में बैचेन हो जाते हैं। वे इबादत के लिए तहखाने में आना ही नहीं चाहते। लेकिन जब हम विदेश में होते हैं, वे मस्जिद छोड़ना ही नहीं चाहते हैं – वे वहाँ खेलते हैं, वे खुश होते हैं, वे प्रशंसा [आर्किटेक्चर की] करते हैं”।

अब, उनके बच्चे सवाल करते रहते हैं कि मस्जिद कब बन कर तैयार हो जाएगी। परिवार आगामी रमजान को पहली बार असली मस्जिद में मनाने की उम्मीद कर रहा है। “हो सकता है हम इफ्तार और रात का खाना मस्जिद में ही खाएं, ” वे कहते हैं।

“अगर अंत में मस्जिद बनती है। तब हमें ख़ुशी होगी। लेकिन हमारा उत्साह ख़तम हो चुका है, ” स्तामोऊ कहती हैं। “हमारे इंतज़ार को दस साल हो चुके हैं और यह सब सिर्फ घटिया राजनीति की वजह से हुआ है।”

मूल लेख aljazeera.com पर प्रकाशित हुआ है जिसका सियासत के लिए हिंदी अनुवाद मुहम्मद ज़ाकिर रियाज़ ने किया है।

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