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एन डी ए हुकूमत मसर्रत आलम की रिहाई रोक सकती थी

नई दिल्ली सदर राज के दौरान किया गया फ़ैसला : कांग्रेस

नई दिल्ली

सदर राज के दौरान किया गया फ़ैसला : कांग्रेस

कश्मीरी अलाहदगी पसंद लीडर मसर्रत आलम की रिहाई पर हुकूमत को तन्क़ीदों का निशाना बनाते हुए अपोज़िशन ने आज कहा कि ये फ़ैसला उस वक़्त किया गया जबकि रियासत में सदर राज नाफ़िज़ था। एन डी ए हुकूमत उसे रोक सकती थी।

वक़फ़ा सिफ़र के दौरान ये मसला उठाते हुए जीवित्र आदित्य संध्या (कांग्रेस) ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट कमिशनर ने बताया कि मुबय्यना तौर पर रियासती मोतमिद दाख़िला को मसर्रत आलम को महरूस रखने के बारे में मतला किया और बताया कि अदालती अहकामात के मुताबिक़ उन्हें सलाखों के पीछे रखने के लिए ताज़ा हुक्मनामा जारी करना होगा।

उन्होंने बताया कि ज़िला हुक्काम ने मुताल्लिक़ा एस पी को ये हिदायत दी कि मसर्रत आलम को रिहा कर दिया जाये और मोतमिद दाख़िला को इस बारे में मतला किया जबकि रियासत में सदर राज नाफ़िज़ था। उन्होंने कहा कि अगर मर्कज़ चाहता तो ताज़ा हुक्मनामा की इजराई को यक़ीनी बनाया जा सकता था।

इस तरह मसर्रत आलम को मज़ीद महरूस रखना मुम्किन था। उन्होंने कहा कि मर्कज़ या तो इस मामले में ग़ाफ़िल था या फिर वो रियासती इंतेज़ामीया के हाथों खिलौना बन गया।

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