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एबीवीपी के खिलाफ विरोध मार्च में स्टूडेंट्स के साथ राजनीतिक दल भी शामिल हुईं

नई दिल्ली: वाम से जुड़े छात्र संगठन ऐसा ने रामजस कॉलेज में हिंसा की घटना के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को जिम्मेदार ठहराते हुए इसके तिरंगा यात्रा के जवाब में दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर में विरोध मार्च निकाला, जबकि कांग्रेस से जुड़े छात्रसंघ ने परिसर में शांति बहाली के लिए प्रतीकात्मक अनशन किया. इस बीच राजनीतिक दलों के नेता भी इस मामले में खुलकर सामने आ गए. ऐसा नेतृत्व में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों और शिक्षकों ने खालसा कॉलेज से कला संकाय तक मार्च निकाला जो बाद में सभा में तब्दील हो गया. मार्च में वामपंथी नेता सीताराम येचुरी और डी राजा, जनता दल (यूनाइटेड) के केसी त्यागी भी शामिल हुए, जबकि कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी अनशन स्थल पर पहुंचे.

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प्रदेश 18 के अनुसार, ऐसा ने इस मामले में पांच मार्च को मंडी हाउस से संसद तक मार्च निकालने की भी घोषणा की है. इस बीच आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की और उन्हें डीयू में हिंसा के जिम्मेदार, छात्रा गुरमेहर कोर को धमकी देने और देश विरोधी नारे लगाने वालों को गिरफ्तार करने की मांग की. उधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रामजस कॉलेज के बाहर कथित तौर पर पुलिस ज्यादतियों के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक को नोटिस जारी कर एक महीने में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. छात्रों ने कला संकाय में विवेकानंद की प्रतिमा के सामने तिरंगे के नीचे सभा किया. वहाँ एक काला बैनर भी लगा था जिस पर ‘जस्टिस फॉर वीमोला’ लिखा हुआ था. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रनेता कन्हैया सहित सैकड़ों छात्रों व छात्राओं ने एबीवीपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. छात्रों का कहना था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध रखने वाली यह संगठन अपने विचारों को देश पर थोपना चाहती है लेकिन उनकी इस कोशिश के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी.

कन्हैया ने एबीवीपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह आर्थिक नीतियों, महिला स्वतंत्रता और सच्चर समिति की रिपोर्ट पर चर्चा नहीं करती बल्कि मारपीट, गाली गलौज और हिंसा करती है. कन्हैया ने सवाल किया कि उमर खालिद को बोलने की अनुमति न देने का अधिकार उसे कैसे मिल गया. छात्र नेता ने कहा कि उसके खिलाफ राष्ट्रद्रोह के आरोप लगे लेकिन अभी तक पुलिस इस मामले में आरोप तय तक नहीं कर सकी है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान का प्रतीकात्मक जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि इस बार होली भगवा होगी. कन्हैया ने कहा, ”मोदी जी हम हर रंग की होली खेलते हैं और बिलकुल से एक रंग लागू करने की कोशिश सफल नहीं होने देंगे.” कांग्रेस नेता श्री तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भाजपा फासीवादी सोच के कारण अन्य आवाजों को दबाने के अपने विचार को पूरी तरह से लागू करने की कोशिश कर रही है, इसलिए विभिन्न विचारधाराओं के लोग इस के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं.

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