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ऐमनिस्टी रिपोर्ट में दावा, असद सरकार ने 13 हजार लोगों को कैदी बनाकर मारा

बेरुत: अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ऐमनिस्टी इंटरनैशनल ने अपनी एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया है कि सीरिया में बशर अल-असद सरकार ने लगभग 13,000 लोगों की हत्या कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, मारे गए सभी लोग एक जेल में कैद थे।

ऐमनिस्टी के मुताबिक, साल 2011 से 2015 के बीच 5000 से 13,000 लोगों की हत्या की गई। बताया गया है कि जिन लोगों को मारा गया उनको सेडनाया जेल में कैदी बनाकर रखा गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हत्या करने के बाद लाशों को सामूहिक कब्रों में दफना दिया गया था। ऐमनिस्टी ने यह रिपोर्ट सोमवार को जारी किया।

इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि किस तरह कैदियों को सामूहिक रूप से मौत के घाट उतारा गया। 50-50 का समूह बनाकर आधी रात को उन्हें जेल से बाहर निकाला जाता था और फिर एक से तीन मिनट लंबी उनकी अदालती कार्रवाई होती और उनको कोई बचाव का मौका नहीं दिया जाता था।

पहले उनको प्रताड़ित कर बयान लिया जाता था और उसी को आधार बनाकर उनको मौत के घात उतार दिया जाता था। उन्हें मारते समय सबसे पहले उनके हाथ बांध दिए जाते और उनके आंखों पर पट्टी बांधी जाती थी। उसके बाद उन सभी को एक भूमिगत कोठरी में ले जाया जाता था जहां दस स्टैंड होते थे। इन सभी स्टैंड्स पर एक-एक कर उन्हें फांसी पर लटका दिया जाता था। यह हत्याकांड ज्यादातर सोमवार और बुधवार को अंजाम दिया जाता था।

ऐमनिस्टी का कहना है कि 2011 में जब असाद सरकार के खिलाफ जन विरोध शुरू हुआ उसी समय से हजारों की संख्या में राजनैतिक बंदी गायब होने लगे। उन्हें सीरिया की जेलों में कैदी बनाकर रखा जाने लगा। उस दौरान हजारों की संख्या में कैदियों मौत के घाट उतारा गया। कई कैदियों की गुपचुप तरीके से हत्या की गई।

गौरतलब है कि इससे पहले अपनी जारी एक और रिपोर्ट में ऐमनिस्टी ने कहा था कि सीरियाई सरकार द्वारा कम-से-कम 17,000 लोगों की हत्या कराई है। इस बार जो आकंड़ा सामने आया है वह उस इसके अतिरिक्त है।

ऐमनिस्टी के इस रिपोर्ट के अनुसार, सेडनाया जेल में जिन लोगों की हत्या की गई, उनमें से ज्यादातर राजनैतिक बंदी और आम आदमी थे। इसके अलावा उसमें ऐसे अधिकारी और सैनिक भी शामिल हैं, जिन्होंने असद सरकार का साथ छोड़ दिया था। ऐमनिस्टी की इस रिपोर्ट में एक जेल के पूर्व अधिकारी के हवाले लिखा है कि मरने वालों में बहुत बड़ी तादाद डॉक्टरों, इंजिनियरों और प्रदर्शनकारियों की भी थी।

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