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ऐसा लगता है कि अफसर माफिया से मिले हैं : हाईकोर्ट

रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार की काम करने की सिस्टम पर सख्त नाराजगी जताई है। कहा कि सरकार माफिया का मदद करे, यह कोर्ट बर्दाश्त नहीं करेगा। ऐसा लगता है कि अफसर माफिया से मिले हुए हैं। सरकार असली मुजरिमों को बचाने की कोशिश करती है। कोर्ट के हुक्म की तामील नहीं करती है। महाधिवक्ता दफ्तर इस बात का ध्यान रखे कि सरकार की छवि माफिया को बचाने वाली की नहीं बने। चीफ जस्टिस वीरेंद्र सिंह व जस्टिस एस चंद्रशेखर की बेंच जनकल्याण समिति, लातेहार के सदर प्रह्लाद प्रसाद की क़त्ल के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका के मुताबिक प्रह्लाद प्रसाद कोयला डंपिंग यार्ड से हाेने वाले आलूदगी के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, इसीलिए उनकी क़त्ल कर दी गई।

कोर्ट ने इससे पहले सरकारी वकील से इस मामले में एफआईआर की जानकारी मांगी थी। सरकार का हक नहीं मिलने और एसपी के बजाए डीएसपी की ओर से आए जवाब आने पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने यह तनक़ीद की। कोर्ट ने एजी आॅफिस पर भी नाराजगी जताई। कहा सरकारी वकील सही वक़्त पर जवाब नहीं देते, कोर्ट रूम में वक़्त मांगते हैं, गलती करने पर बार बार सॉरी कहते हैं, यह सब नहीं चलेगा। सरकार की गलतियों के लिए चीफ जस्टिस को अपना बीपी क्यों बढ़ाना चाहिए।

गलत लोगों को अगर पुलिस ने पकड़ा है तो एसपी की जेब से विक्टिम को मुआवजा दिया जाएगा। कोर्ट ने एक सप्ताह में एसपी को जवाब दायर करने का हुक्म दिया और सुनवाई के लिए बुध की तारीख मुक़र्रर की। झारखंड हाईकोर्ट ने एजी आफिस को भी अब किसी प्रकार के दस्तावेज लेने के लिए आम दस्तुरुल अमल के तहत आने को कहा है। कहा है कि किसी प्रकार के दस्तावेज के लिए दफ्तर मुक़र्रर फीश दे तभी उसे दस्तावेज दिए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार की ओर से कोर्ट को मदद नहीं किया जाता तब उसे कोर्ट की तरफ से मदद क्यों किया जाना चाहिए।

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