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ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो

ऐ ईमान लाने वालो! अल्लाह से डरो और ठीक बात किया करो। अल्लाह तुम्हारे आमाल दुरूस्त कर देगा और तुम्हारे कुसूरों से दरगुजर फरमाएगा। जो शख्स अल्लाह और उसके रसूल (स०अ०व०) की इताअत करे उसने बड़ी कामयाबी हासिल की।

ऐ ईमान लाने वालो! अल्लाह से डरो और ठीक बात किया करो। अल्लाह तुम्हारे आमाल दुरूस्त कर देगा और तुम्हारे कुसूरों से दरगुजर फरमाएगा। जो शख्स अल्लाह और उसके रसूल (स०अ०व०) की इताअत करे उसने बड़ी कामयाबी हासिल की।

मजकूरा आयतों में अल्लाह तआला ईमान वाले बंदो की आखिरत में निजात और हमेशा की कामयाबी के लिए बेहतरीन नुस्खा तजवीज फरमाए हैं क्योंकि सिर्फ कलमा-ए-तौहीद का अपनी ज़ुबान से अदा करना और नबी करीम (स०अ०व०) की रिसालत का इकरार करना काफी नहीं है बल्कि जिंदगी के शब व रोज भी ठीक ठीक अल्लाह की मर्जी और उसकी ताबेदारी में गुजारना हकीकत में ‘‘अहले ईमान’’ होने का सबूत फराहम करना है।

यूं तो अल्लाह तआला तमाम बंदो से मोहब्बत रखता है लेकिन उसके खास बंदे (जो अहले ईमान) हैं उनसे बहुत ज्यादा मोहब्बत रखता है। तब ही तो उनका नाम लेकर इरशाद हो रहा है ‘‘ऐ ईमान वालो’’। गरज कि अहले ईमान की अल्लाह तआला खास तौर पर निगरानी फरमाते हैं और उनकी दुनियावी जिंदगी को तमाम जिंदगियों से दूर करने के लिए और उनको दिली मरजो से महफूज रखने की खातिर यानी शिर्क व कुफ्र, फसक व फुजूर और निफाक जैसी बीमारियों से दूर रखने के लिए नबी करीम (स०अ०व०) के पाक दिल पर अपने एहकाम नाजिल करते रहे ताकि अहले ईमान बंदे उस पर अमल करते हुए अल्लाह को राजी कर लें और उसके फजल व करम के मुस्तहक बनकर आखिरत वाली हमेशा की जिंदगी में कामयाब हो जाएं।

यूं तो कुरआन सारे इंसानों की हिदायत के लिए और नबी करीम (स०अ०व०) पूरी जिंदगी के रहनुमा व रहबर है और जो कोई कुरआन की तालीमात का इंकार करता है और नबी करीम (स०अ०व०) के बतलाए हुए तरीके पर नहीं आता यानी अपनी जिंदगी अल्लाह व रसूल से बगावत व सरकशी में गुजारता है दरअस्ल ऐसा शख्स आखिरत के घाटे में पड़ने वाला है। लेकिन ऊपर जिक्र की गई आयतो में खिताब खास तौर पर अहले ईमान से है। इन आयतो में अल्लाह तआला ईमान वालों को चार बातों की तरफ मुतवज्जो फरमाया- अल्लाह से डरने का हुक्म, ठीक बात करने की तालीम, अल्लाह से डरने और सच्ची बात करने से कुसूरो की माफी होती है और अल्लाह तआला की इताअत और रसूल (सल0) की पैरवी दरहकीकत कामयाबी की जमानत है।

यह बात दिन के उजाले की तरह है कि खुदा का खौफ खुदा के कुर्ब और उसकी रहमत का मुस्तहक और जन्नत के करीब करता है और हकीकत भी यही है कि खुदा का खौफ ही एक ऐसी चीज है जो बंदे को हद में रखता है यानी जब आदमी शैतान मरदूद के चक्कर में आकर गुनाह के करीब पहुंच जाता है तो उस वक्त कोई ताकत खुदा के खौफ के सिवा मौजूद नहीं रहती जो उसे गुनाह से रोक सके। दूसरी बात यह बयान होती है कि अहले ईमान हमेशा सच कौल इख्तेयार करे यानी अल्लाह की पसंदीदा बात करे। गरज यह कि मुसलमानों की ज़ुबान से जो बात निकले सच्ची और नपी तुली बात हो।

अल्लाह तआला अपने बंदो से मुख्तलिफ मौकों पर मुख्तलिफ तरीको से उनका इम्तेहान लेते हैं और यह देखते हैं कि यह मेरे बंदे अपनी अमली जिंदगी में ईमान लाने के तकाजों को पूरा करते हैं या नहीं। मसलन किसी को काजी बनाकर यह देखते हैं कि यह फैसले के मौके पर अल्लाह का पसंदीदा फैसला करते हैं या किसी रिश्तेदारी या मंसब व ओहदो को पेशेनजर रखकर फैसला देते हैं।

किसी को शहादत के मौके पर आजमाते हुए यह देखते हैं कि गवाही के मामले में यह सच कहता है कि या किसी आदमी के दबदबे में आकर या किसी ऊंची शख्सियत से मरऊब होकर गलत बयानी से काम लेता है।

इसके इलावा आज के जमाने में हम देखते हैं कि अखबारात व मैगजीन, माहनामे बहुत ही अहमियत के हामिल चीजें हैं। जिसके जरिए से लोगो तक खबरों को पहुंचाया जाता है, मालूमात फराहम की जाती है, फिक्र व नजर में इंकलाब बरपा किया जाता है। लिहाजा इन चीजों के जरिए भी अल्लाह तआला किसी को सहाफी बनाकर, किसी को मजमून निगार व कलमकार बनाकर, किसी को मिल्लत का रहनुमा व रहबर बनाकर उठाता है और किसी को सहाफती जिम्मेदारियां अता करते हुए यह देखना चाहता है कि यह लोग अपने जोरे कलम से ठीक और सच्ची बात कहते हैं या फिर जमाने की रफ्तार को देखते हुए अपने कलम को मोड़ते हैं या अल्लाह की पसंदीदा बात लोगों तक पहुंचाते हैं या फिर अरबाबे एक्तेदार की खुशनूदी की खातिर या किसी लालच में आकर हक से बचते हुए अपने कलम को फरोख्त कर देते है।

तीसरी बात यह बयान की गई है कि अहले ईमान जब सिर्फ अल्लाह से डरेंगे और अपनी जिंदगी ‘‘कौल सदीद’’ में गुजारेंगे तो उसके नतीजे में अल्लाह तआला की मेहरबानी शामिल हाल होगी। यानी अल्लाह तआला अहले ईमान बंदो के आमाल को दुरूस्त कर देंगे। यानी बदआमालियों से बचाए रखेंगे और एक बड़ा फजल व करम यह होगा कि जो कुछ कुसूर हो चुके होंगे अल्लाह उनके साथ दरगुजर का मामला फरमाते हुए माफ फरमा देंगे।

चैथी और आखिरी बात यह इरशाद होती है कि आखिरत की कामयाबी व कामरानी का सारा दारोमदार अल्लाह की और नबी करीम (स०अ०व०) की इताअत व फरमांबरदारी मे पोशीदा है यानी जो कोई अल्लाह के एहकामात और नबी करीम (स०अ०व०) की तालीमात के ऐन मुताबिक जिंदगी बसर करेगा हकीकत में उस शख्स ने बहुत बड़ी कामयाबी पा ली। यानी जो कोई मन चाही जिंदगी गुजारने से बचते हुए रब चाही जिंदगी गुजारेगा उसी ने फलाहे आखिरत को पा लिया। (मौलाना खालिद सैफ उल्लाह रहमानी)

———‍‍बशुक्रिया: जदीद मरकज़

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