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ओडिशा: फिर से एक आदिवासी बेटा अपनी माँ के शव को ट्राली रिक्शा पर ले जाने को मजबूर

जाजपुर: हालांकि राज्य सरकार ने पिछले महीने फ्री वैन सेवा महापर्याना नाम से शुरू किया है, लकिन वहां कथित तौर पर कोई एम्बुलेंस न होने की वजह से एक आदीवासी महिला की शव को उसके बेटे ने ट्राली रिक्शा पर डाल कर अपने गाँव ले जाने पर मजबूर हुआ.

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आपको बता दें कि इस दुर्घटना को एक महीने से भी कम समय हुआ है जिस में आदिवासी आदमी, दाना मांझी ने, कालाहांडी अस्पताल से अपने घर तक पहुंचने के लिए अपने कंधों पर पत्नी के शरीर के साथ 12 किलोमीटर की दूरी तय किया था, अभी इस दुर्घटना को महीना भी नहीं लगा है कि फिर एक और आदिवासी महिला का जाजपुर जिला अस्पताल में निधन हो गया उनके परिवार के सदस्यों ने उसकी पार्थिव शरीर को उनके गाँव ले जाने के लिए एक ट्रोली रिक्शा का प्रयोग किया.
पाना तीरीका, एक 65 वर्षीय आदिवासी, को पेट में दर्द होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। देखते ही देखते उसकी हालत गंभीर हो गई, डॉक्टरों ने उसे एससीबी मेडिकल कॉलेज कटक उसको रेफर कर दिया, लेकिन उनका जल्द ही निधन हो गया।
हालांकि राज्य सरकार ने पिछले महीने फ्री वैन सेवा महापर्याना नाम से शुरू किया है, लकिन जाजपुर जिला अस्पताल में कथित तौर पर कोई एम्बुलेंस शनिवार को विश्वकर्मा पूजा के कारण उपलब्ध नहीं था।
अस्पताल के पास कुछ दलालों ने कथित तौर पर 4 किमी दूर गांव अन्कुला, शरीर को ले जाने के लिए परिवार से अत्यधिक राशि की मांग की। उनके पास कोई दूसरा विकल्प न होने की वजह से , मृत महिला के बेटे, गुना तीरिका, ने एक ट्राली रिक्शा मंगाया जिस पर वह अपनी मां की शरीर को अपने गांव के लिए ले गया। जाजपुर मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी फनिन्द्रा पानीग्रही अपनी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।

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