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ओवैसी मुसलमानों का क़ौमी चेहरा बनना चाहते हैं

ऑ‌ल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के लीडर असद्दुदीन ओवैसी अपनी पार्टी को मुसलमानों की क़ौमी पार्टी बनाने में जुटे हुए हैं। वह इस अक्लियती तबके के लोगों को मुतावज्जा कर मुल्क में मुस्लिम पार्टी की खाली जगह को भरने की कोशिश कर रहे हैं।

ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र विधानसभा इलेक्शन 2014 में 25 सीटों पर चुनाव लड़ी और वह दो सीटें जीतने में कामयाब रहे। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुए बलदिया इंतेखाबात में उनकी पार्टी दूसरे नंबर की फातेह बनकर उभरी। पार्टी अब बेंगलुरु बलदिया के इलेक्शन में 29 सीटों पर इ‍लेक्शन लड़ रही है। बेंगलुरु बलदिया(Municipal) के इलेक्शन 22 अगस्त को होने हैं।

ओवैसी ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि, ‘किसी भी सियासी पार्टी की तौसीअ का मंसूबा कुदरती है। किसी भी जम्हूरियत में हर सियासी पार्टी खुद की तौसीअ करना चाहेगी।’ उनकी पार्टी के नाम का मतलब मुसलमानों की ऑल इंडिया काउंसिल है। हालांकि, ओवैसी का कहना है कि सिर्फ मुसलमान वाला ख्याल गलत है। उन्होंने कहा, ‘मेरी पार्टी मुस्लिम पार्टी नहीं है। यह गलत ख्याल है। मैंने हर जगह गैर-मुसलमान (ओबीसी और दलित भी) उम्मीदवार भी उतारे हैं।’ एआईएमआईएम से जुड़े हैदराबाद के 3 मेयर हिंदू थे।

ओवैसी कांग्रेस के इस दावे से और नाराज हो जाते हैं कि वह बीजेपी का मोहरा हैं, जिसका मकसद मुल्क में सेक्युलर वोटों को तकसीम करना है। वह कहते हैं कि, ‘यह दलील कि हमने सेक्युलरिजम को कमजोर किया है, पूरी तरह से गलत है।

मुसलमान कांग्रेस को ही ताईद करते आ रहे थे। हालांकि, हमने अपनी मस्जिद गंवाई, फिर्कावाराना दंगों में अपना घर और बिजनस खोया। दहशतगर्द की आड़ में हमारे बेगुनाह नौजवानों को उठाया जा रहा है। क्या उनकी अगुवाई में ही हम आरएसएस और बीजेपी से लड़ सकते हैं? आरएसएस और बीजेपी को रोकने के लिए उन्होंने क्या किया है? मोदी को 2014 में किस तरह से 280 सीटें मिलीं? 2014 के बाद से वे हर इलेक्शन हार रहे हैं।

उन सभी इंतेखाबात में असद्दुदीन ओवैसी कहां था?’ 46 साल के ओवैसी लंदन से पढ़े हैं और वह 2004 से हैदराबाद के एमपी हैं। हालांकि, उन्होंने बिहार में इलेक्शन लड़ने पर अब तक फैसला नहीं किया है। उन्होंने बताया, ‘हमने बिहार के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है।

जैसे ही हम इस बारे में फैसला करेंगे, तो आपको बताएंगे।’ ओवैसी ने अपनी पार्टी को हैदराबाद से बाहर निकालकर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई Municipalities तक पहुंचाया है।

ओवैसी की मुहिम बेंगलुरु के Municipalities इंतेखाबात में 29 उम्मीदवार उतारने की है। हालांकि, कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने उन्हें आवमैइ इजलास , पदयात्रा या अपने उम्मीदवारों के लिए तश्हीर करने की इज़ाज़त नहीं दी है। उन्होंने बताया कि, ‘बेंगलुरु में मुझे रोका गया है। यह सिद्धारमैया सरकार का तानाशाही रवैया दिखाता है।

जब रियासत में विधानसभा इंतेखाबात होंगे, तो मेरी पार्टी बेंगलुरु और कर्नाटक के दूसरे हिस्सों से इलेक्शन लड़ेगी। मैं सिद्धारमैया को चैलेंज़ करता हूं कि तब वह मुझे रोकें। मेरी जान की कीमत पर ही वह मुझे रोक सकते हैं।’

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