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औरंगाबाद: बीबी के मकबरे में स्थित मस्जिदों में नमाज की इजाज़त की मांग तेज

औरंगाबाद: औरंगाबाद का ताज कहलाने वाले बीबी के मकबरे में स्थित दो मस्जिदों को आबाद करने की मांग में तीव्रता आती जा रही है। पहले प्रिंस याकूब हबीब तूसी ने इस मामले को उठाया, तो अब औरंगाबाद सामाजिक संगठन भी इस मामले पर उठ खड़ी हुई हैं।

न्यूज़ नेटवर्क समूह न्यूज़ 18 के मुताबिक़ इस संबंध में युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुरातत्व विभाग के अधीक्षक को ज्ञापन प्रस्तुत कर मस्जिदों में नमाज़ अदा करने की इजाजत की मांग की है।

ताज डेक्कन कहलाने वाले बीबी के मकबरे में स्थित दो मस्जिदें वीरान पड़ी हुई हैं। सन् 1965 तक इन मस्जिदों में बा जाब्ता पाँचों वक्त की नमाज़ होती थी, लेकिन बीबी का मकबरा पुरातत्व विभाग की हिरासत में जाने के बाद इन मस्जिदों में नमाज़ अदा करने पर रोक लगा दी गई। पिछले सात दशकों से यह मस्जिदें वीरान हैं।

 

हाल ही में मुगल परिवार के वारिस राजकुमार याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने मकबरे की जांच और उन मस्जिदों को आबाद करने की मांग की। याकूब हबीदुद्दीन तूसी की मांग के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया।अब युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में पुरातत्व विभाग के अधीक्षक डॉ। ए एम वी सुब्रमण्यम से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन प्रस्तुत किया।

माइनॉरिटी एजूकेशनल एंड वेलफेयर फाउंडेशन के ज़िम्मेदारों का कहना है कि धार्मिक स्थल पर मज़हबी संस्कार के अदायगी का संविधान ने अधिकार दिया है। मुसलमानों को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इस मौके पर ताजमहल की मस्जिदों में नमाज की अनुमति का भी हवाला दिया गया।इसके अलावा प्रिंस याकूब हबीब तूसी ने पुरातत्व विभाग को एक मांग पत्र भेजा है।

पत्र में नमाज़ की अनुमति न देने के मामले में औरंगाबाद के उलेमा और नेताओं को साथ लेकर 14 मार्च से भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। औरंगाबाद के युवाओं ने इसका पुरजोर समर्थन करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि पुरातत्व विभाग को इन दोनों मस्जिदों में नमाज़ की अदायगी की अनुमति देनी चाहिए।

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