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औलाद की तरबियत में माँ का अहम किरदार

नारायणपेट‌ में ख़वातीन का जलसा, मुफ़्तिया रिज़वाना ज़रीं का ख़िताब

नारायणपेट‌ में ख़वातीन का जलसा, मुफ़्तिया रिज़वाना ज़रीं का ख़िताब
नारायण पेट,16 जनवरी: रूबरू पापा साहब दरगाह रोड नारायण पेट ज़िला महबूबनगर मुस्लिम वेलफ़ेर कमेटी के ज़ेर एहतिमाम मुनाक़िदा ख़वातीन के इजतेमा से ख़िताब करते हुए मुफ़्तिया रिज़वाना ज़रीं प्रिंसिपल जामिआतुल मोमिनात ने कहा कि इस्लामी मुआशरे की तामीर के लिए ख़वातीन की अहम ज़िम्मेदारी है कि घर की एक ख़ातून का दीनदार होना सारे ख़ानदान का दीनदार होना है।

औलाद की तरबियत में माँ के किरदार को बहुत ज़्यादा अहमियत दी जाती है। घर की औरत सालिह मुआशरे की तशकील देने में अहम किरदार अदा करती है। जदीद फैशन के नाम पर मौजूदा दौर में मुस्लिम ख़वातीन उर्यानीयत का शिकार हो रही हैं। औरत का बारीक लिबास पहन्ना जिस से इस का जिस्म नुमायां हो ये अज़रूए शिरा नाजायज़ है। आजकल तज़य्युन-ओ-आराइश की जो मुतनव्वे किस्में हैं और इस के लिए ब्यूटी पार्लर के नाम से जो मराकिज़ क़ायम किए जा रहे हैं इस में जहां बेजा तकलीफ़ात हैं वहीं इस में इसराफ़ भी है और इसराफ़ करने वालों को अल्लाह तआला ने शैतान का भाई क़रार दिया है।

इस लिए मुस्लिम ख़वातीन को इन बेजा तकल्लुफ़ात और इसराफ़ से इजतिनाब करना चाहीए। अल्लाह और उस के रसूल की लानत से बचना चाहीए। मुहतरमा ने ख़वातीन पर ज़ोर दिया कि वो इस्लामी तालीमात पर अमल करें, खासतौर पर पर्दे की पाबंदी करें ताकि मौजूदा दौर में होने वाले फ़ित्नो से महफ़ूज़ रहा जा सके। जलसे का आग़ाज़ हाफ़िज़ समीरा ख़ातून की क़िराते कारिया नाज़ मुहम्मदी की नाअते शरीफ़ से हुआ।

आलिमा गोसिया शाहिद ने कहा कि नमाज़ अल्लाह की मफ़रूज़ा इबादतों में एक अहम तरीन इबादत है जो हर मुस्लमान मर्द-ओ-औरत पर फ़र्ज़ है। नमाज़ दीन का सुतून है नमाज़ मोमिन की मेराज है, आलिमा साएरा बानो ने कहा कि हुक़ूक़ुल ईबाद में सब से पहला हक़ माँ बाप का होता है जिस शख़्स के माँ बाप इस से राज़ी हूजाएं अल्लाह तआला इस से राज़ी होजाता है और जिस के वालदैन नाराज़ हों तो अल्लाह और उस‌ के रसूल भी इस से नाराज़ होते हैं।

आलिमा रेशमा बेगम ने कहा कि अल्लाह का ज़िक्र कसरत से किया करो क्योंकि अल्लाह के ज़िक्र में ही दिलों का चैन है जो अल्लाह के ज़िक्र से ग़ाफ़िल होता है अल्लाह तआला उस को दुनियावी मसाइब में मुबतला करता है, आलिमा रुक़य्या फ़ातिमा मुअल्लिमा जामिआतुल मोमिनात‌ ने हुज़ूर की सुन्नतों पर रोशनी डाली, आलिमा समीरा ख़ातून ने कहा कि क़ुरआन मजीद दस्तूरे हयात है तिलावते क़ुरआन मजीद अफ़ज़ल तरीन इबादत है।

हुज़ूर ने फ़रमाया सब से बड़ा इबादत गुज़ार वो है जो सब से ज़्यादा तिलावते क़ुरआन मजीद करने वाला है। हुज़ूर का इरशाद है कि तुम में से बेहतर शख़्स वो है जो क़ुरआन सीखे और सिखाए और फ़रमाया कि हर हुर्फ़ के एवज़‌ अल्लाह तआला दस नेकियां अता करता है। मुफ़्तिया सय्यिदा फ़रह नाज़ हाश्मी ने कहा कि हुसूल-ए-इल्म के लिए मर्द या औरत की कोई तख़सीस नहीं, इलम के ज़रीये अल्लाह तआला दरजात को बुलंद करता है।पसेपर्दा मुस्लिम वेलफ़ेर कमेटी के ज़िम्मेदार हज़रात ने इजतेमा के इंतिज़ामात अंजाम दिए। दुआ-ओ-सलाम पर इजतेमा इख़तेताम को पहूँचा।

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