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कभी दिन10 घंटे का और एक घंटा40 मिनट का हुआ करता था

नई दिल्ली: बहुत कम मनुष्यों के बीच इस बात का ज्ञान होगा कि मौजूदा 60 मिनट के एक घंटे कभी 40 मिनट का हुआ करता था, और बारह बारह घंटे के वर्तमान दिन रात में पहले रात 12 घंटे की होती थी दिन 10 घंटे का हुआ करता था। बाकी दो घंटों में एक घंटा सुबह का और एक घंटा शाम का होता था। इसके साथ एक और दिलचस्प पहलू यह भी है कि एक ओर जहां पूरे अंकों गतिविधियां एक से दस के अंक तक सीमित हैं और फिर उनमें शून्य लगाकर अंकों की शक्ति बढ़ाई जाती है वहीं धरती पर एक सामान्य दिन 10 घंटे के बजाय 24 घंटे का होता है।

ऐसा क्यों है? इसका श्रेय प्राचीन मिस्र के सिर बंधा है।  जब मानव सभ्यता शिकारी समाज से कृषि की ओर बढ़ने लगी तो लोगों को एहसास हुआ कि उन्हें अपनी वस्तुओं की गिनती की जरूरत है। इस तरह लोगों ने पहले उंगलियों पर ठीक इसी तरह गिनती सीखना शुरू किया जैसे आजकल बच्चे सीखते हैं। सवाल यह है कि उंगलियां भी दस होती हैं रात और दिन बारह बारह घंटे के कैसे हुए? इस बात को यह माना जाता है कि मिस्र को 12 अंक प्रणाली सुमेर (प्राचीन बाबुल) की संस्कृति से विरासत में मिला है, जिसमें 8 उंगलियों के साथ अंगूठे के जोड़ों(Thumb joints)को भी गिना जाता था मिस्र के लोगों ने रात और दिन को बारह बारह घंटों में इस प्रकार बांटा कि 10 घंटे दिन, एक, एक घंटा सुबह और पश्चिम के समय और 12 घंटे अंधेरे के लिए निर्धारित किए गए।

जहां तक ​​एक घंटे में 40 मिनट होने का सवाल है तो मिस्रियों ने घंटों को निर्धारित 36 छोटे सितारों के झुरमुट से करना शुरू किया, जिनमें से प्रत्येक क्लस्टर 40 मिनट बाद उगता था और इस तरह वह हर चालीस मिनट बाद एक नया घंटे की शुरूआत करते थे।

कई सदियों बाद यूनानियों ने इस प्रणाली को बेमानी करार दिया, वह दिन की लंबाई को ठीक करना चाहते थे, जिसके बाद Hipparchus नामक विशेषज्ञ ज्योतिष ने मिस्री सितारों घड़ी इस घड़ी के अनुसार ढाला जो हम आज काल‌ उपयोग करते हैं, जो प्रकाश और अंधकार को 12, 12 घंटों के समान लंबाई में बांटा गया। इस तरह आज हमारा दिन 24 घंटे होता हैं।

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