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कर्नाटक: उर्दू अकादमी की अंग्रेजी पढ़ने वाले बच्चों को उर्दू से जोड़ने की एक नई पहल

बेंगलुरु। लोगों की शिकायत रहती है कि उर्दू का साहित्यिक पूंजी युवा पीढ़ी से दूर होता जा रहा है। लेकिन उर्दू जुबान की दुखती हुई इस रग पर आखिर कौन हाथ रखे? इस महत्वपूर्ण समस्या को देखते हुए कर्नाटक की उर्दू अकादमी ने एक नई पहल शुरू की है। अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले बच्चों को उर्दू अदब से जोड़ने का एक प्रयास बेंगलुरु में देखने को मिला है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार छात्रों में आम तौर पर हम्द, नात, कव्वाली के मुकाबले आयोजित की जाती हैं। इन पारंपरिक प्रतियोगिताओं से हट कर कर्नाटक उर्दू अकादमी ने छात्रों को नए प्रतियोगिताओं का आगाज़ किया है। यह मुकाबले हैं उर्दू इमला, उर्दू खुश ख़त, उर्दू उच्चारण और उर्दू लतीफे का। बेंगलुरु नाई हॉल में आयोजित समारोह में बच्चों ने शेर, लतीफ़ों, मुकाल्मो पर प्रेक्टिस करने के बाद मंच पर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। समारोह में बच्चों के कवि हाफ़िज़ कर्नाटकी की सरपरस्ती में प्रशिक्षण पाने वाले के बीच बैतबाज़ी का मुकाबला हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि इन प्रतियोगिताओं में अधिकतर अग्रेज़ी माध्यम के छात्रों ने भाग लिया।
बेंगलुरु के अलावा शिकारीपुर के छात्रों ने भी प्रतियोगिता में भाग लिया. उर्दू अकादमी के अध्यक्ष अजीज़ुल्लाह बेग की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में डॉक्टर फिरदौस की किताब ‘बच्चों कीधनक रंग दुनिया और मुनीर अहमद जामी की किताब’ मासूमियाँ ‘का विमोचन प्रक्रिया में आया। समारोह में कहा गया कि युवा पीढ़ी को उर्दू साहित्य की ओर आकर्षित किया जाए ताकि उर्दू के भविष्य पर कोई आंच न आने पाए।

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