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कर्नाटक उर्दू एकेडेमी के बजट में इज़ाफ़ा

क़मर उल-इस्लाम वज़ीर बलदी नज़म वनसक़ , अकलियती बहबूद वावक़ाफ़ की कर्नाटक उर्दू एकेडमी के बजट में तख़फ़ीफ़ से मुताल्लिक़ अख़बारात में वज़ाहत शाय हुई है कि उन्होंने 20 लाख रुपये की तख़फ़ीफ़ नहीं की है बल्कि बी जे पी हुकूमत ने साल पिछ्ले तमाम एकेडे

क़मर उल-इस्लाम वज़ीर बलदी नज़म वनसक़ , अकलियती बहबूद वावक़ाफ़ की कर्नाटक उर्दू एकेडमी के बजट में तख़फ़ीफ़ से मुताल्लिक़ अख़बारात में वज़ाहत शाय हुई है कि उन्होंने 20 लाख रुपये की तख़फ़ीफ़ नहीं की है बल्कि बी जे पी हुकूमत ने साल पिछ्ले तमाम एकेडेमियों के फ़ंड में तख़फ़ीफ़ की थी।

मौजूदा हुकूमत इस के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। इस वज़ाहत पर मज़ीद वज़ाहत तलब करते हुए बीदर के बुज़ुर्ग शायर मुहम्मद अमीर उद्दीन अमीर ने कहा है कि मौजूदा हुकूमत बी जे पी के बजट पर नहीं चल रही है बल्कि कांग्रेस हुकूमत ने बेलगाम के असेंबली सेशन में अपना सपलमनटरी बजट पेश कियाथा।

लिहाज़ा ये बात दरुस्त है कि मौजूदा हुकूमत कांग्रेसी बजट के तहत चल रही है ओ राफ़सोस इस बात का है कि अक़लियतों के वोट लेकर बरसर-ए-इक़तिदार आचुकी कांग्रेस हुकूमत के वज़ीर अकलियती फ़लाह-ओ-बहबूद आज तक भी कर्नाटक उर्दू एकेडमी को बी जे पी के बजट के तहत चला रहे हैं।

अख़बारी बयान के मुताबिक़ वज़ीर मौसूफ़ ने तालियों की गूंज में कहा कि उन्होंने 400 करोड़ के बजट को एक हज़ार करोड़ कर दिया है और चूँकि उर्दू एकेडमी इसी महिकमा के तहत आती है उस की ग्रांट में इज़ाफ़ा करना मुश्किल नहीं है।

वज़ीर मौसूफ़ का बयान सरासर दरोग़ पर मबनी है। उन्होंने बजट को एक हज़ार करोड़ तक पहुंचा दिया है और किसी को कानों कान ख़बर तक नहीं हुई।

दूसरी बात ये कि जब उर्दू अकैडमी का बजट बढ़ाने में कुछ मुश्किल दरपेश नहीं है तो बजट बढ़ाने में पसोपेश से काम क्यों लिया जा रहा है?।माह दिसमबर में मौसूफ़ ने अख़बारी बयान दिया था कि वो वज़ीरे आला सदर उमय्या से कह कर बजट बढ़ाएंगे लेकिन अब ये दूसरी बात बयान की जा रही हैकि अगले साल के बजट में उर्दू एकेडमी के लिए ज़ाइद बजट की मंज़ूरी अमल में लाई जाएगी ।

वज़ीर-ए-आला सदर उमय्या से कह कर अकेडमी के बजट को बढ़ाने का मुआमला क्युं नाकाम हुआ? अब तक एकेडमी क्युं बी जे पी के बजट पर चल रही है ? इस के अलावा भी कई सवालात कर्नाटक के शारा-ए-और उदबा बिरादरी के हैं कि मौसूफ़ क्युं एकेडमी के चैरमैन के ओहदे पर फ़ाइज़ हैं ? हरबार एलान किया जाता है कि आइन्दा एकेडमी तशकील दी जाएगी और तशकील देने का हक़ीक़ी दिन नहीं आता।

मुहम्मद अमीर उद्दीन अमीर ने अपने सहाफ़ती बयान के आख़िर में इंतिबा ह दिया कि अगर एकेडमी की तशकील पारलीमानी चुनाव के बाद तक के लिए टाल दी जाएगी तो उर्दू अदीब और शारा-ए-कांग्रेस कोवोट देने के बजाये किसी और पार्टी को वोट देंगे।और उस की ज़िम्मेदार य पूरी तरह वज़ीर बराए अकलियती फ़लाह पर होगी।

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