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कर्नाटक में उपचुनाव

मैसूर: चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ मतदाता पेपर ऑडिट ट्रायल इकाइयों के उपयोग का फैसला किया है। उसके द्वारा 9 अप्रैल ननजन गुड़ और गंडलअपीट विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भ्रष्टाचार को रोका जा सके। उपायुक्त आर रणदीव ने जो निर्वाचन अधिकारी भी हैं, ने कहा कि पहली बार वी वी पी ए टी इकाइयों के उन क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाएगा।

ऐसे इकाइयों 2014 बलहारी और बैंगलोर दक्षिण के लोकसभा क्षेत्रों के चयन बूथ में इस्तेमाल किए गए थे उन्होंने लोगों से कहा कि उत्तर प्रदेश से 500 वी वी पी टी इकाइ लाए गए। यह उपकरण 2006 के बाद तैयार की गई ई वी एम्स के लिए ही उपयुक्त साबित होते हैं। यह सिस्टम चुनावी धांधली को रोकने के प्रति एक कदम है।

मतगणना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में कोई समस्या पैदा हों या फिर हेराफेरी या उलटफेर के आरोपों के मामले में तबा गये स्लिप्स‌ जो डिब्बे में सुरक्षित रहेंगी ‘का उपयोग वोटों की पुष्टि के लिए किया जाएगा। वी वी पी ए टी इकाइयों प्रिंटर जैसी मशीन है जो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से कनेक्ट रहेगी और वोटर‌ की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का बटन दबाने पर एक तबा गये कागज निकलता है जिसमें उम्मीदवार नाम और उम्मीदवार जिसे वोट दिया गया का निशान होता है ‘ताकि राय दाता इस बात की जांच कर सके कि उसका वोट पर्याप्त रूप मढ़ गया है। उसका उम्मीदवार द्वारा समीक्षा के बाद यह स्लिप ई वी क यम से लगे कंटेनर में डाला जाएगा। जहां तक ​​मतदान अधिकारियों को पहुँच सकेगी।

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