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कर्नाटक में बी जे पी की मुश्किलात

रियासत कर्नाटक में बी जे पी के लिए सूरत-ए-हाल मुश्किल होती जा रही है । रियासत में ताक़तवर मौक़िफ़ रखने वाले मिस्टर बी एस यदे विरुपा जिन्होंने पार्टी को रियासत में मुस्तहकम मुक़ाम दिलाने और नीचे से उठाकर ऊपर तक करने में अहम रोल अदा कि

रियासत कर्नाटक में बी जे पी के लिए सूरत-ए-हाल मुश्किल होती जा रही है । रियासत में ताक़तवर मौक़िफ़ रखने वाले मिस्टर बी एस यदे विरुपा जिन्होंने पार्टी को रियासत में मुस्तहकम मुक़ाम दिलाने और नीचे से उठाकर ऊपर तक करने में अहम रोल अदा किया है वो दुबारा चीफ मिनिस्टर की गद्दी हासिल करने के लिए बेचैन हो गए हैं ।

वो छः माह क़ब्ल तक रियासत के चीफ मिनिस्टर थे । लोक आयुक़्त की जानिब से कानकनी स्क़ाम में इन को माख़ूज़ किए जाने के बाद पार्टी हाईकमान की हिदायत पर बादल नख़्वास्ता उन्होंने इस ओहदा से इस्तीफ़ा दिया था वो भी इस वायदा पर कि उन्हें जलदी ही कोई अहम ज़िम्मेदारी दी जाएगी ।

उन्हें रियासत पार्टी सदारत सौंपने का तीक़न भी दिया गया था । मिस्टर येदि युरप्पा ने पार्टी क़ियादत के इस तीक़न के बाद मजबूरी की हालत में चीफ मिनिस्टर की कुर्सी छोड़ी और उन्हें के हामियों में शुमार किए जाने वाले मिस्टर एस वी सदानंद गौड़ा को ये ओहदा सौंपा गया था । मिस्टर येदे युरुप्पा को उम्मीद थी कि मिस्टर सदानंद गौड़ा उनके इशारों पर नाचने लगेंगे और उनके काम जारी रहेंगे लेकिन एसा हुआ नहीं। मिस्टर सदानंद गौड़ा ने इबतदा-ए-में तो मिस्टर यदे विरुपा को सर आँखों पर बिठाया ।

बाद में वो धीरे धीरे रियासती नज़म-ओ-नसक़ और कुछ हद तक अरकान असैंबली पर भी अपनी गिरिफ़त बनाने में कामयाब होगए और अब वो नहीं चाहते कि यदे विरुपा के इशारों पर काम करें। वो आज़ादाना तौर पर काम करना चाहते हैं । यही तर्ज़ अमल मिस्टर यदे विरुपा केलिए नागवार गुज़ार है ।

इनका ख़्याल है कि रियासत में पार्टी को मुस्तहकम करने केलिए उन्हों ने जो मेहनत की है वो तन-ए-तनहा की है और उसका समर भी उन्हें को मिलना चाहीए । वो नहीं चाहते कि जो मेहनत उन्होंने की है इसका सेहरा किसी और के सर बंध जाये या इसका फल कोई और उचक जाय । इबतदा-ए-में कुछ दिन इंतिज़ार करने के बाद अब वो दुबारा चीफ मिनिस्टर की कुर्सी हासिल करने के लिए सरगर्म हो गए हैं और उन्होंने कल शाम अपने हामी अरकान असेंबली का इजलास तलब करते हुए पार्टी हाईकमान को अल्टीमेटम दे दिया कि उन्हें 27 फरवरी तक चीफ मिनिस्टर बना दिया जाये बसूरत दीगर वो अपने लिए अलग राह तलाश करने पर मजबूर हो जायेंगे ।

चीफ मिनिस्टर सदानंद गौड़ा ने इस अल्टीमेटम को ज़्यादा अहमियत देने से इनकार किया है और इससे मिस्टर येदी युरप्पा की इज़्ज़त नफ़स मुतास्सिर हो सकती है और शायद हो सकता है कि वो इसके बाद मज़ीद इश्तिआल का शिकार हो जाएं।

बी जे पी के क़ौमी सदर मिस्टर नितिन गडकरी फ़ौरी तौर पर बैंगलौर पहूंच गए और उन्होंने पूरी सूरत-ए-हाल का जायज़ा लेने के बाद ख़ुद मिस्टर येदे युरप्पा पर वाज़िह कर दिया कि रियासत में चीफ़ मिनिस्टर की तब्दीली का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता । पार्टी क़ियादत में तबदीली फ़िलहाल हाईकमान के ज़ेर ग़ौर नहीं है और उन्हें एक आम बी जे पी रुकन असेंबली की हैसियत से ही गुज़ारा करना पड़ेगा । चीफ मिनिस्टर सदानंद गौड़ा ने भी कल रात ही वाज़िह कर दिया था कि रियासती असेंबली की माबक़ी मीआद तक वही चीफ मिनिस्टर बरक़रार रहेंगे और रियासती असेंबली में जारीया साल का बजट भी वही पेश करेंगे ।

मिस्टर बी एस येदी युरप्पा ने 27 फ़रवरी को अपने हामी अरकान असेंबली के लिए ज़ुहराना का एहतिमाम किया है और तमाम अरकान असेंबली को इसमें शिरकत करने की दावत दी है । उनकी इस दावत पर कितने अरकान असेंबली शरीक होते हैं इस पर मुस्तक़बिल के हालात का इन्हिसार होता है । वैसे तो मिस्टर येदी युरप्पा ने कल भी एक इजलास तलब किया था जिस में पार्टी के 65 अरकान असेंबली ने शिरकत की थी लेकिन अब जबकि पार्टी हाई कमान की जानिब से क़ियादत में तब्दीली का इमकान मुस्तर्द कर दिया गया है इसके बाद इजलास में कितने अरकान असेंबली शिरकत करेंगे तो अहमियत की बात होगी ।

ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि मिस्टर येदी युरप्पा पार्टी के मौक़िफ़ को देखते हुए ख़ुद ख़ामोश हो जायेंगे । वो बहरसूरत रियासत में अपनी गिरिफ़त को मुस्तहकम ही रखना चाहते हैं और उन्हें अंदेशा है कि अगर मिस्टर सदानंद गौड़ा को मज़ीद बरक़रारी की इजाज़त दी जाय तो वो धीरे धीरे पार्टी और इंतिज़ामीया पर अपनी गिरिफ्त मुस्तहकम कर लेंगे इसमें इनका मौक़िफ़ कमज़ोर हो जाएगा ।

मिस्टर येदी युरप्पा चाहते हैं कि सूरत-ए-हाल उनके क़ाबू से बाहर होने से पहले ख़ुद चीफ मिनिस्ट्री का ओहदा हासिल कर लिया जाय । मिस्टर येदी युरप्पा की ख़ाहिश के बरख़िलाफ़ पार्टी फ़िलहाल क़ियादत में तब्दीली के लिए तैयार नहीं है और मिस्टर नितिन गडकरी ने ये बिलकुल वाज़िह भी कर दिया है ।

अब जबकि मिस्टर यदे युरप्पा चीफ मिनिस्ट्री का ओहदा हासिल ना होने पर पार्टी से बग़ावत करने को भी तैयार हैं और दूसरी जानिब पार्टी उन की बग़ावत को ख़ातिर में लाने को तैयार नहीं है तो फिर इस बात के अनुदेशों को मुस्तर्द नहीं किया जा सकता कि यहां
क़ियादत और येदी युरप्पा में टकराव की सूरत-ए-हाल पैदा होगी ।

ये सूरत-ए-हाल बी जे पी के इन दावों को खोखला साबित करती है कि वो डिसीप्लीन की पाबंद है महिज़ इक़्तेदार की उसे कोई परवाह नहीं है । जुनूबी हिंद में बी जे पी की पहली हुकूमत इबतेदा ही से मसाइल का शिकार रही है और अब ये सूरत-ए-हाल अपनी इंतेहा को पहूँचती नज़र आरही है ।

ये सूरत-ए-हाल बी जे पी के लिए परेशान कुन हो सकती है और येदी युरप्पा और बी जे पी में टकराव को टालने के लिए हालाँकि मुख़्तलिफ़ गोशों से और ख़ास तौर पर आर एस उसकी जानिब से कोशिशें हो सकती हैं। देखना ये है कि आया टकराव यक़ीनी हो जाएगा या

फिर येदी युरप्पा को मनाने मे आर एस एस वगैरह कामयाब होते हैं। दोनों ही सूरतों में रियासत के अवाम गैर अहम होकर रह जाएंगे और उन के मसाइल पर हुकूमत की तवज्जा इतनी नहीं रह पाएगी जितनी होनी चाहीए ।

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