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कर्नाटक में शिशु मृत्यु दर में खासी वृद्धि

बेंगलूरू। विभिन्न केन्द्रीय और राज्य प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन के बावजूद कर्नाटक में शिशु मृत्यु दर में वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार सालाना 12,000 से अधिक नवजात शिशुओं की राज्य में मौत हो रही है। 1 अप्रैल 2013 से 16 नवम्बर 2016 के मध्य 44,630 शिशुओं की मृत्यु हुई है जबकि 2,433 गर्भवती या प्रसवोत्तर माताओं की इसी अवधि में मृत्यु हुई है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2013-14 में शिशु मृत्यु दर 12,560 थी जो 2014-15 में बढ़कर 12,621 हो गई। इसी तरह राज्य में वर्ष 2015-16 में 16 नवंबर, 2016 तक 11,438 शिशुओं की मृत्यु दर्ज की गई। वर्ष 2016 में नवम्बर तक 8,011 शिशुओं की मृत्यु दर्ज की गई है। अधिकारी के अनुसार जन्म के 2 से 15 दिन के दरम्यान 45 प्रतिशत शिशुओं की मौत हुई है।

विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि शिशु मृत्यु दर के मामले (2015-16 में 1,163 लोगों की मृत्यु) 10 जिलों में अधिक हुए हैं। कर्नाटक में होने वाली मौतों का प्रतिशत 50 से अधिक बेलगावी में जबकि बेल्लारी में (627), विजयपुरा (815), चित्रदुर्ग (449), धारवाड़ (588), कलबुर्गी (559), कोप्पल (518), मैसूर (508), शिवमोगा (505) और यादगीर में (400) है। इस वर्ष कोडागु में 93 और बेंगलुरू ग्रामीण में 56 शिशुओं की मृत्यु हुई थी।

अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2013-14 में 722 महिलाओं ने प्रसव के दौरान या तुरंत बाद उनके जीवन को खो दिया। इसमें 2014-15 में 645 मौतें, 2015-16 में 635 और 2016-17 नवम्बर तक 431 मौत हैं। वर्ष 2015-16 में होने वाली मौतों की संख्या में सर्वाधिक बेलगावी में (81), धारवाड़ (44), बेल्लारी में (40), रायचूर (30) और कलबुर्गी में (39) है।

बाल स्वास्थ्य अधिकारी बेट्टा स्वामी ने कहा कि यह मौतें अंधविश्वासों, पौष्टिक भोजन, बाल विवाह, गरीबी, जन्मजात विसंगति और किशोर गर्भावस्था की अनुपलब्धता, स्वास्थ्य, समय से पहले प्रसव और गर्भावस्था से जुडी स्वास्थ्य बीमारियों के महत्व के बारे में जागरूकता की कमी के कारण हुई हैं।

कर्नाटक में वर्तमान शिशु मृत्यु अनुपात एक लाख प्रसव 174 है। अधिकारी ने कहा कि विभाग वर्ष 2020 तक इस आंकड़े को 134 तक लाने की कोशिश कर रहा है। अधिकारी के अनुसार प्रसव को लेकर महिलाओं को शिक्षित किया जाएगा और ग्रामीण महिलाओं का प्रसव से पूर्व पंजीकरण किया जायेगा और उनको सभी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाएगा।

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