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कशमीरी मुसालहत कार अपनी रिपोर्ट पर हुर्रियत से मुलाक़ात पर आमादा

जम्मू-ओ-कश्मीर के लिए मुक़र्रर किए गए मुसालहत कारों ( समझौता करने वाले) ने अपनी जो तफ़सीली रिपोर्ट हुकूमत को पेश की है इस की फीड बैक के लिए वो अलहैदगी पसंद ग्रुप हुर्रियत के बिशमोल दीगर (दूसरे) ग्रुप्स के साथ भी मुज़ाकरात (समझौता) के लि

जम्मू-ओ-कश्मीर के लिए मुक़र्रर किए गए मुसालहत कारों ( समझौता करने वाले) ने अपनी जो तफ़सीली रिपोर्ट हुकूमत को पेश की है इस की फीड बैक के लिए वो अलहैदगी पसंद ग्रुप हुर्रियत के बिशमोल दीगर (दूसरे) ग्रुप्स के साथ भी मुज़ाकरात (समझौता) के लिए तैयार हैं।

दिलीप पडगावंकर जो तीन मुसालहत कारों ( समझौता करने वालो ) में से एक हैं, ने हुकूमत की जानिब से उन की रिपोर्ट को मंज़र-ए-आम पर लाने के बाद कहा कि उन्होंने हुकूमत को जो रिपोर्ट पेश की है, लाज़िमी ( जरूरी) बात है कि इस रिपोर्ट पर अलहैदगी पसंद ग्रुप्स बिशमोल हुर्रियत भी कोई ना कोई फीड बैक ( Fee Back/जानकारी) देना पसंद करेंगे।

लिहाज़ा हम उन से किसी भी वक़्त मुलाक़ात के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे पहले में एक और अहम बात उन के गोश गुज़ार करना चाहता हूँ कि हम ने अपनी जो रिपोर्ट तैयार की है इस में जम्मू-ओ-कश्मीर के अवाम के सयासी अज़ाइम को मर्कज़ी (केंद्रीय) हैसियत हासिल है।

उन्होंने कहा कि हुकूमत ख़ुद भी ये चाहती है कि रिपोर्ट पर फीड बैक ( जानकारी) हासिल की जाए जिन में सयासी जमातें भी शामिल होंगी। बादअज़ां राय शुमारी के ज़रीया हुकूमत रिपोर्ट का इतलाक़ (जारी) कर सकती है। जब उन से ये पूछा गया कि क्या उन की रिपोर्ट अलहैदगी पसंद ग्रुप जैसे हुर्रियत कान्फ्रेंस के नज़रियात की अक्कासी ( नकल) करती है? जिस का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मुसालहत कारों (समझौता करने वाले) की टीम ने ज़ाइद अज़ 700 वफ़द (प्रतिनिधीयों/ DELEGATIONS) से बातचीत की है और तमाम के नज़रियात की नुमाइंदगी की है।

याद रहे कि मिस्टर पडगावंकर के इलावा जामिआ मीलिया यूनीवर्सिटी की प्रोफेसर राधा कुमार और साबिक़ इन्फ़ार्मेशन कमिशनर एम एम अंसारी दीगर ( अन्य/ दूसरे) दो मुसालहत कारों में शामिल थे, जिन्होंने अपनी 176 सफ़हात पर मुश्तमिल तवील रिपोर्ट गुज़शता साल हुकूमत के हवाले की थी।

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