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कश्मीरी पंडितों की तरह उत्तर प्रदेश से हमें पलायन न करना पड़े- योगी आदित्यनाथ

बुलंदशहर। महन्त योगी आदित्य नाथ ने कहा है कि 1990 में कश्मीर से कश्मीरी पंडितों ने सामूहिक पलायन किया था। उन्होंने कहा- मुझे भय लगता है कि अगर आप अभी भी नहीं जागे तो दुर्भाग्य से वो दिन आपके सामने न आने पाए कि कश्मीरी पंडितों की तरह आपको भी यूपी से सामूहिक पलायन करने को मजबूर होना पड़े।

सोमवार को बुलंदशहर के मोतीबाग पहुंचे महन्त योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी की जनसभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि यूपी में कौन सुरक्षित है? मुजफ्फरनगर में दंगा होता है, बुलंदशहर में सामूहिक गैंगरेप की घटना होती है, और यूपी की सरकार यहां दंगा भी करवाती है और दंगाइयों को संरक्षण भी देती है। बलात्कारियों को संरक्षण देती है और गुण्डों को सरकार संरक्षण देती है।

चाहे वो समाजवादी पार्टी की सरकार हो या बसपा की। इन सब ने 14-15 सालों में यूपी की राजनीति का अपराधिकरण किया है और अपराधियों का राजनीतिकरण किया है। अपराध का व्यवसायिकरण करके इन पेशवर अपराधियों को राजनीति में उतारकर आम जनता के लहू को चूसने की खुली छूट दे दी है।

योगी आदित्य नाथ ने कहा कि बीजेपी की सरकार यूपी में आती है तो यहां जितने भी कट्टीघर चल रहे हैं वो बंद करवा दिए जाएंगे। पश्चिमी यूपी और यूपी में यह यांत्रिक बुच्चड़खाने नहीं चल पाएंगे। यूपी की सरकार से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कई बार से कह रहा है कि उत्तर प्रदेश के अवैध कट्टीघरों को बंद करें, लेकिन यह सरकारें हैं कि मानती ही नहीं।

योगी आदित्य नाथ ने कहा कि आज मैं मुलायम सिंह की चिंता को देख रहा था। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि मैं सपा-कांग्रेस गठबंधन का प्रचार नही करूंगा। मुलायम सिंह को मालूम है कि समाजवादी पार्टी तभी तक जीवित है जब तक कांग्रेस मृत है और जिस दिन कांग्रेस जीवित हो गई उस दिन समाजवादी पार्टी को दूध की मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाएगा।

इस लिए मुलायम सिंह कभी नहीं चाहेंगे कि कांग्रेस यूपी में जिंदा हो। इस लिए मुलायम सिंह ने कहा कि यह चुनावी गठबंधन नहीं ये ठगों का बंधन है ये ठगबंधन है। यह गठबंधन नहीं हो सकता।

योगी आदित्य नाथ ने कहा कि जितनी भी कमेटियां कैराना गईं, सबने कहा वहां से पलायन हुआ है। मैं कहता हूं कैराना से ही नहीं पश्चिमी यूपी के लगभग 25 से ऊपर ऐसे कस्बे हैं जिन कस्बों से बहुसंख्यक लोगों को पलायन करना पड़ा। यूपी सरकार ने एक बार भी इमानदारी से जांच करके इस पर कोई श्वेतपत्र जारी करने का साहस नही दिखाया।

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