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कश्मीर में पैलट गन का इस्तेमाल सोच-समझ कर हो-सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा पैलेट गन के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की बात कही है। जनसत्ता की  खबर के मुताबिक अदालत ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि इसका अंधाधुंध इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब मांगा है।

अदालत ने केंद्र की ओर से मौजूद अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से पैलेट गन का विकल्प खोजने के लिए गठित समिति की रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने अगले छह हफ्ते के भीतर इस संबंध में जरुरी कदम उठाए जाने की बात कही। जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल की वजह से कई लोगों की जानें गई हैं। इसके साथ ही सैकड़ों लोगों के गम्भीर रूप से घायल होने की भी खबर है।

पैलेट गन में छोटे-छोटे छर्रे होते हैं, जो टारगेट के शरीर में जाकर चुभ जाते हैं।   इस गन के इस्तेमाल के बाद ऐसे  मामले सामने आए हैं  जिनमें घायलों ने अपनी आंखों की रोशनी तक खो दिया।घाटी में 2010 के बाद पहली बार इस तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं। साल 2010 में हुई हिंसा में 100 लोगों की मौत हुई थी। पैलेट गन का पहली बार इस्तेमाल उसी दौरान हुआ था। पेलेट से घायल हुए लोगों के घाव भरने में लंबा समय लगता है और निशान रह जाते हैं। कई बार पैलेट गन के कारण हुए गहरे घावों की सर्जरी तक करनी पड़ती है।

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