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कश्मीर में हुई हिंसा की वजह से इस साल गईं 371 जानें

श्रीनगर। पिछले कई सालों की तरह इस साल भी कश्मीर में हूई हिंसा में कई मासूम लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी। इस साल भी आकड़ा सिलसिलेवार जारी है। आंकड़ो के मुताबिक इस साल घाटी में कुल 371 लोगों की जान गई, जिनमें से 126 नागरिक, 144 वो लोग जिनपर आतंकवादी होने का आरोप था, 63 सेना के जवान, 11 CRPF के जवान, 18 पुलिसकर्मी, 8 BSF के जवान और 1 SSB का जवान शामिल है।

ध्यान रहे कि हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी के एनकाउंटर होने के बाद से ही कश्मीर घाटी में हिंसा जारी है और विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला थम नहीं रहा था। इस घटना के बाद से कश्मीर की वादियों में बंदूकों की आवाजें थम नहीं रही हैं क्योंकि वहां बुरहान वानी के समर्थक भारतीय सेना पर पत्थरबाजी करते आ रहे हैं। कश्मीर में तैनात भारतीय सेना ने 8 जुलाई को दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी को मार गिराया था।

बता दें कि साल 2015 में यह आंकड़ा 195 था, जोकि इस साल के 371 के मुकाबले काफी कम था। दरअसल हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद फैली हिंसा में काफी लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। जिस कारण पिछले साल के मुकाबले घाटी में इस साल ज्यादा नागरिकों की मौते हुईं।

वहीं सुरक्षा बलों के लिए यह राहत की बात रही कि उन्होंने इस साल कई बड़े आतंकियों का खात्मा किया जो काफी समय से सुरक्षा बलों के लिए सिरदर्द बने हुए थे। इन खूंखार आतंकियों में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी, सज्जाद अहमद, शारिक अहमद भट्ट, मुश्ताक अहमद समेत कई आतंकी शामिल हैं। वहीं इस साल सेना पर आतंकियों ने कुछ बड़े हमलों को अंजाम दिया जिनमें उरी आतंकी हमला, नगरौटा हमला और पंपोर हमला आदि प्रमुख हैं।

 

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