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कश्मीर समस्या की संजीवनी अटल जी के पास ही क्यों थी?

कश्मीर की समस्या का समाधान करने के लिए आजकल तमाम सियासी पार्टियां कोई ना कोई फार्मूला सुझाती आई हैं लेकिन असल मामले में अगर गौर करें तो कश्मीर को समझने का जो नजरिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी में था वो आज तक किसी अन्य राजनेता मेें नही दिखता।

तस्वीरों में देंखे आखिर क्यो कश्मीर विवाद को सुलझाना अटल जी के लिए ही संभव कहा जाता है। कुछ महीनों पहले एक समारोह के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि अगर अटल कुछ और साल पीएम रह जाते तो शायद कश्मीर के मुद्दे का हल हो जाता। 

दरअसल अटल जी कश्मीर की समस्या का हल एक मध्यस्थ फार्मूले के आधार पर पूरा करना चाहते थे। कश्मीर का विवाद किस तरह से हल हो इसके लिए अटल जी ने तीन प्वाइंट की सोच को विकसित करने का एक फार्मूला भी बताया था। 
 
अटल जी का मत था कि कश्मीर के विवाद को जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत के आधार पर सुलझा दिया जाए। खास बात ये भी थी कि अटल जी ने इस आशय के लिए अलगाववादी नेताओं से भी बातचीत की शुरूआत कराई थी। अलगाववदियों समेत कश्मीर के पक्षों से बात करने के लिए जिम्मा पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को दिया गया।

आडवाणी ने कश्मीर के पक्ष पर अलगाववादियों से बात भी की। इसके अलावा अटल जी द्वारा कश्मीर को मुख्यधारा की दिशा में जोड़ने के लिए कई बड़े कदम भी उठाए गए थे। इनमें न सिर्फ लोगों से बातचीत का मुद्दा शामिल था बल्कि सीमा के रास्ते से पाक से शांति बहाली की कोशिशें भी शामिल थी। 

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