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कश्मीर से बाहरी लोगों को भगाने की साजिश

पिछले दो दिनों से दिल्ली में डेरा जमाए बैठे कश्मीर के चीफ अलगाववादी लीडरों ने वादी में फौज की तरफ से चलाये जा रहे स्कूलों और बाहरी लोगों के खिलाफ फिर से मुहिम छेड़ दिया है। कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीरियों से फौज की तरफ स

पिछले दो दिनों से दिल्ली में डेरा जमाए बैठे कश्मीर के चीफ अलगाववादी लीडरों ने वादी में फौज की तरफ से चलाये जा रहे स्कूलों और बाहरी लोगों के खिलाफ फिर से मुहिम छेड़ दिया है। कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीरियों से फौज की तरफ से चलाये जा रहे स्कूलों में बच्चों को न पढ़ाने और अपने घरों से बाहरी किराएदारों को निकालने का ऐलान किया है।

मुख्तलिफ गुटों में बंटे अलगाववादी व हुर्रियत लीडर फौज की तरफ से चलाये जा रहे स्कूलों को अपने एजेंडे को कमजोर बनाने और बाहरी मजदूरों की कश्मीर में आमद को कश्मीरी मुसलमानों को अक्लीयत बनाने की साजिश करार दे रहे हैं।

अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में तकरीबन 236 दिनों की नजरबंदी से आज़ाद हुए गिलानी ने कहा, ‘कश्मीर में हर रोज़ बाहरी लोगों की तादाद बढ़ रही है। काम धंधे की तलाश में आने वाले ये लोग नई दिल्ली की तरफ से एक साजिश के तहत ही भेजे जा रहे हैं।’ इसके इलावा पिछले हफ्ते कुपवाड़ा में भी गिलानी ने एक रैली में लोगों से कहा था कि वह अपने बच्चों को फौज के स्कूलों से दूर रखें।

फौज की तरफ से कश्मीर में खैर सगाली के नाम किए जा रहे काम असलियत में कश्मीरियों को गुमराह करने की हिंदुस्तानी साजिश है। गिलानी ने कहा कि ये स्कूल कश्मीरी बच्चों में गैर इस्लामिक आदतों को पैदा कर रहे हैं।

इसके बाद उन्होंने जुमेरात के रोज़ श्रीनगर के गावकदल इलाके में लोगों से कहा कि वे बाहरी लोगों को अपने मकानों में किसी तरह से जगह न दें।

गौरतलब है कि साल 2006 और 2008 में भी कश्मीर में बाहरी लोगों के खिलाफ अलगाववादियों ने मुहिम चलाया था, जिसके सबब वादी में आए हजारों मज़दूरों को भागना पड़ा था।

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