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क़ज़ाफ़ी के मुस्तहकम गढ़ केलिए घमसान जंग

सैफ उल-इस्लाम फ़रार , सादी क़ज़ाफ़ी महसूर , बाग़ी बनी वलीद क़स्बा पर हमले केलिए तैय्यार

सैफ उल-इस्लाम फ़रार , सादी क़ज़ाफ़ी महसूर , बाग़ी बनी वलीद क़स्बा पर हमले केलिए तैय्यार
शीशान (लीबिया) /4 सितंबर (ए एफ़ पी) लीबिया के नए हुकमरानों की वफ़ादार फ़ौज ने मुअम्मर क़ज़ाफ़ी के बाक़ी बचे हुए आख़िरी मुस्तहकम गढ़ पर यलग़ार करदी, जब कि खु़फ़ीया फाइल्स से उन की हुकूमत के अमरीका और बर्तानिया के जासूसी महिकमों से रवाबित का इन्किशाफ़ हुआ। जंगजूओं के एक कमांडर ने कहा कि क़ज़ाफ़ी की अफ़्वाज की पुरअमन ख़ुद सुपुर्दगी के मक़सद से बनी वलीद में ताय्युनात क़ज़ाफ़ी की अफ़्वाज पर हमला नहीं किया गया और तरह बुल्स के जुनूब मशरिक़ में वाक़्य नख़लिस्तान को जंग से मसतसनी क़रार दिया गया है। उन्हों ने कहा कि हम हमले की तैय्यारी कर रहे हैं। शीशान देहात की फ़ौजी चौकी के कमांडर मुहम्मद अलफ़सीह ने कहा कि क़ज़ाफ़ी के वफादारों और फ़ौज से मुज़ाकरात ख़तन हो चुके हैं। ये लोग संजीदा नहीं हैं। उन्हें दोबार तीक़न दिया गया था कि अगर वो हथियार डाल दें तो महफ़ूज़ रहेंगे, लेकिन उन की जानिब से वादों से इन्हिराफ़ किया गया। दरहक़ीक़त वो सिर्फ़ सूरत-ए-हाल का फ़ायदा उठाते हुए अपने बचाओ की कार्रवाई कर रहे हैं। नई हुकूमत के उबूरी वज़ीर-ए-दाख़िला अहमद दरात ने ए एफ़ पी से कहा कि वो क़स्बा पर क़बज़ा करने तक अपनी कार्रवाई महिदूद रखेंगे और उन्हें उम्मीद है कि आज या कल बनी वलीद को आज़ाद करवा लिया जाएगा। क़ौमी उबूरी कौंसल के मुक़ामी तर्जुमान ने जो अब लीबिया की हुक्मराँ है, कहा कि सफ़ अव्वल 15 ता 20 केलो मीटर शुमाल में ताय्युनात है और फ़ौज पेशरफ़्त के लिए तैय्यार है, हमें शहर में दाख़िल होने के लिए सिर्फ हुक्म का इंतिज़ार है। कल रात क़ज़ाफ़ी की फ़ौज ने शहर से बाहर निकलने की कोशिश की थी, लेकिन जंगजूओं ने जवाबी कार्रवाई और चंद मिनट तक झड़प जारी रही। क़स्बा तरहौना में फ़ौजी कौंसल के नायब सरबराह ने कहा कि क़ज़ाफ़ी की फ़ौज को हथियार डालने के लिए आठ बजे सुबह तक मोहलत दी गई है। अबद अलरज़्ज़ाक़ नदोरी ने कहा कि मर्द आहन मुअम्मर क़ज़ाफ़ी के फ़र्ज़ंद सादी अब भी बनी वलीद क़स्बा में मुक़ीम हैं। इन के हमराह दीगर सीनियर ओहदादार भी हैं, जिन का ताल्लुक़ साबिक़ हुकूमत से है। मुअम्मर क़ज़ाफ़ी के मशहूर फ़र्ज़ंद सैफ़ उल-इस्लाम क़स्बा से फ़रार हो चुके हैं। इन्क़िलाबीयों ने बनी दलीद के क़बाइली सरदारों को अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो वो सुलह का पर्चम लहराएं या फिर जंग के लिए तैय्यार हो जाएं। साबिक़ बाग़ीयों की जानिब से जारिहाना कार्रवाई मुनज़्ज़म मालूम होती है, हालाँकि क़ौमी उबूरी कौंसल के सदर नशीन मुस्तफ़ा अबद अलजलील ने कहा कि बन ग़ाज़ी में सुलह का ऐलान किया जा चुका है और 10 सितंबर तक उस की तामील की जाएगी। उन्हों ने कहा कि हम इस मौक़िफ़ में हैं कि ताक़त के बल पर किसी भी शहर में दाख़िल हो सकते हैं, लेकिन हम ख़ूँरेज़ी से गुरेज़ करना चाहते हैं, ख़ास तौर पर क़बाइली इलाक़ों में जो बेहद हस्सास हैं। उन्हों ने कहा कि जंग बंदी के दौरान भी फ़ौज ताय्युनात रहेगी। नदोरी ने कहा कि बरतरफ़ हुक्मराँ के तर्जुमान मौसी इबराहीम और मंसूर दाओ सदर नशीन इन्क़िलाबी कमेटी, जिस ने मुअम्मर क़ज़ाफ़ी की हुकूमत का तख़्ता उल्टा है, अब भी बनी वलीद में हैं। क़ज़ाफ़ी के फ़र्ज़ंद सादी क़ज़ाफ़ी भी इसी क़स्बा में मुक़ीम हैं, लेकिन उन के मशहूर फ़र्ज़ंद सैफ़ उल-इस्लाम जो सा लस्सी में पेश पेश थे, दो दिन क़बल फ़रार हो चुके हैं। ख़ुदा ही बेहतर जानता है कि वो कहां गए हैं। क़स्बा से फ़रार होने वाले शहरीयों ने कहा कि क़ज़ाफ़ी की बेशतर फ़ौज ज़बरदस्त हथियार लेकर फ़रार हो रही है और पहाड़ों में पनाह ले रही है। नाटो के बमूजब इस के लड़ाका तय्यारों ने असलाह के एक ज़ख़ीरा को बनी वलीद के क़रीब फ़िज़ाई हमलों का निशाना बनाया है। नाटो के तय्यारों ने एक फ़ौजी बैरक, पुलिस कैंप और ग्यारह दीगर एहदाफ़ पर क़ज़ाफ़ी के आबाई क़स्बा सुरते में हमलों का निशाना बनाया है, उन पर बमबारी की गई है। दीगर दो क़स्बे क़ज़ाफ़ी की फ़ौज के क़बज़े में हैं, जिन में से एक साहिली शहर बवाइरात और दूसरा अलजफ़रा नख़लिस्तान के इलाक़ा का क़स्बा हिन् है।
सदर जमहूरीया ने जस्टिस सुमित्रा सेन का अस्तीफ़ा क़बूल करलिया
नई दिल्ली । /4 सितंबर ( पी टी आई ) हुकूमत ने आज ग़ैरमामूली क़दम उठाते हुए कोलकता हाईकोर्ट के जस्टिस सुमित्रा सीन के अस्तीफ़ा को मंज़ूर करलिया जिस से ये क़ियास आराईयां होरही हैं कि लोक सभा में उन के ख़िलाफ़ कल मुवाख़िज़ा की कार्रवाई नहीं की जाएगी । ताहम सरकारी तौर पर उस की तौसीक़ नहीं हुई है । राज्य सभा में गुज़श्ता माह मुवाख़िज़ा के बाद जस्टिस सेन ने लोक सभा में भी इसी नौईयत की कार्रवाई से ऐन क़बल अस्तीफ़ा देदिया था जिस से हुकूमत केलिए अजीब-ओ-ग़रीब सूरत-ए-हाल पैदा होगई । क़ानूनी तौर पर ये राय दी जा रही है कि ऐवान-ए-ज़ेरीं मैं मुवाख़िज़ा की कार्रवाई अस्तीफ़ा के बाद नहीं की जानी चाहीए लेकिन बाअज़ गोशों की जानिब से ये तास्सुर दिया जा रहा है कि मुवाख़िज़ा का अमल मुकम्मल होना चाहीए । सरकारी ज़राए ने बताया कि डिपार्टमैंट आफ़ जस्टिस ने आलामीया सदर जमहूरीया की मंज़ूरी केलिए रवाना किया था जिस पर आज प्रतिभा पाटल ने दस्तख़त करदिए

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