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क़तर ग़ैरमुल्की मज़दूरों के लिए हालात बेहतर बनाने मे नाकाम

हुक़ूक़-ए-इंसानी की आलमी तंज़ीम एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि क़तर में काम करने वाले ग़ैर मुल्की मज़दूरों के हालात में ना होने के बराबर बेहतरी हुई है और क़तर उन के हुक़ूक़ का ख़्याल रखने का वाअदा पूरा करने में नाकाम रहा है।

हुक़ूक़-ए-इंसानी की आलमी तंज़ीम एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि क़तर में काम करने वाले ग़ैर मुल्की मज़दूरों के हालात में ना होने के बराबर बेहतरी हुई है और क़तर उन के हुक़ूक़ का ख़्याल रखने का वाअदा पूरा करने में नाकाम रहा है।

क़तर सन 2022 में मुनाक़िद होने वाले फुटबाल के आलमी मुक़ाबलों का मेज़बान है और वहां इस सिलसिले में जारी तैयारीयों के दौरान ग़ैर मुल्की कारकुनों के हालात-ए कार और रिहायश के बारे में ख़दशात ज़ाहिर किए जाते रहे हैं।

इन तैयारीयों के आग़ाज़ के छः माह के अंदर अंदर ही इंसानी हुक़ूक़ की आलमी तंज़ीम ने ख़बरदार कर दिया था कि क़तर ग़ैर मुल्की मज़दूरों का इस्तिहसाल रोकने में नाकाम हो रहा है। इस पर कतरी हुकूमत ने वाअदा किया था कि आइन्दा ग़ैर मुल्की कारकुनों के हुक़ूक़ का ख़्याल रखा जाएगा।

इस सूरत-ए-हाल पर मुसलसल नज़र रखने वाली एमनेस्टी इंटरनेशनलने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि कुछ शोबा जात में हालात थोड़ा बहुत बेहतर हुए हैं जबकि कुछ में इस सिलसिले में कोई क़दम नहीं उठाया गया।

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