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क़ब्ल और माबाद इक़्तेदार बी जे पी क़ाइदीन के नफ़रत अंगेज़ ब्यानात

अज़ीम जम्हूरी मुल्क हिंदुस्तान को ना जाने किस की नज़र लग गई कि हर तरफ़ नफ़रत और बेचैनी के माहौल को पैदा करने की कोशिश की जा रही है। इक़्तेदार से क़ब्ल और अब इक़्तेदार के बाद बी जे पी क़ाइदीन के नफ़रत अंगेज़ ब्यानात मुल्क की सेक्यूलर साख के लिए ख़तरनाक साबित होते जा रहे हैं। इक़्तेदार से क़ब्ल अवामी इजलासों और अब इक़्तेदार के बाद ऐवान में तक अपनी नफ़रत का असर छोड़ने का उन क़ाइदीन कोई मौक़ा गंवाना नहीं चाहते मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब का गुलदस्ता और अमन का गहवारा इस मुल्क को सियासी आलूदगी मुतास्सिर करने के दर पर आ गई है।

और मुल्क को इस सियासी आलूदगी से रोकने के लिए हर सेक्यूलर शहरी को आगे आना चाहीए और ये वक़्त की ज़रूरत भी है और तक़ाज़ा भी। बी जे पी क़ाइदीन ने चुनाव मुहिम में नफ़रत फैलाने की ऐसी मिसालें क़ायम कीं जिस से कि सेक्यूलर इक़्तेदार शर्मिंदा हो जाए।

सियासी बरतरी और अपने वजूद को बरक़रार रखने के लिए कभी तो कभी सियासी आका को ख़ुश करने की दौड़ में नफ़रत अंगेज़ ब्यानात में बाज़ी मारी जा रही है।

हालाँकि सब के सब सेक्यूलर मुल्क और सेक्यूलर इक़्तेदार की दुहाई और दावा भी करते हैं। सियासत में मज़हब को शामिल करते हुए अपनी कुर्सी और वजूद को बरक़रार रखने का ये माहौल यक़ीनन ख़तरनाक रुजहानात को पैदा कर रहा है और नफ़रत अंगेज़ तक़ारीर और जवाबी तक़ारीर एक रिवाज की शक्ल अख़्तियार करती जा रही है।

जिस को रोकना इंतिहाई ज़रूरी और अहम अमल बन गया है और ताज्जुब है कि उसे ही लोग इक़्तेदार की उन बुलंदियों पर फ़ाइज़ हो रहे हैं जो मुल्क के मक़ासिद और क़ानून का लिहाज़ नहीं रखते और इस अज़ीम सेक्यूलर मुल्क के ऐवानों को भी आलूदा कर रहे हैं।

साध्वी निरंजन का ब्यान राम ज़ादे की हुकूमत या हरामज़ादे की हुकूमत ने ना सिर्फ़ ऐवान की हुर्मत को पामाल बना दिया बल्कि सभी सेक्यूलर इक़्तेदार ताक़तों के लिए लम्हे फ़िक्र बन गया है। लिहाज़ा अवाम ही को चाहीए कि वो ऐसे अफ़राद को ऐवानों में जाने से रोकें और अमन के गहवारा और मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब के गुलदस्ता इस मुल्क को सियासी आलूदगी से बचाते हुए मज़हब की आड़ में नफ़रत के तेज़ाब के ज़रीए तबाह होने से बचाएं।

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