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क़लमदान की तक़सीम में ताख़ीर पर कांग्रेस में नाराज़गी

रियासत उत्तराखंड के बरसर-ए-इक़तिदार कांग्रेस जमात के चीफ़ मिनिस्टर हरीश रावत काबीना में क़लम्दान की तक़सीम में लगातार‌ ताख़ीर की वजह से नाराज़गी पैदा होगई है जो इस बात के लिए ब्रहम है कि इन में से कई वज़रा काफ़ी अर्सा से बे क़लम्दान है

रियासत उत्तराखंड के बरसर-ए-इक़तिदार कांग्रेस जमात के चीफ़ मिनिस्टर हरीश रावत काबीना में क़लम्दान की तक़सीम में लगातार‌ ताख़ीर की वजह से नाराज़गी पैदा होगई है जो इस बात के लिए ब्रहम है कि इन में से कई वज़रा काफ़ी अर्सा से बे क़लम्दान हैं।

काबीनी वज़ीर हरक सिंह रावत ने भी चीफ़ मिनिस्टर के सामने अपनी नाराज़गी दर्ज कराते हुए दो दिन पहले कहा था कि कोई क़लम्दान नहीं होने की वजह से वो ख़ुद को बेकार महसूस कररहे हैं और पार्टी ने अभी तक उनके ज़िम्मा में कोई भी क़लमदान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वो ना सिर्फ़ क़लम्दान की तक़सीम में ताख़ीर पर मायूस है बल्कि चंद लोगों को बगै़र उनकी मर्ज़ी के एससी ए का सदर नशीन मुक़र्रर कर दिया गया है।

ये वो ओहदा है जो बहू गुना के दौर-ए-इक्तदार में वज़ीर-ए-ज़राअत की हैसियत से उनके पास था। ज़राए ने बताया कि उनके इलावा कई एक वज़रा महसूस कररहे हैं कि क़लमदान की तक़सीम में ताख़ीर करते हुए उन्हें यूंही बेकार छोड़ दिया गया है हालाँकि हल्फ़ बर्दारी के 15 दिन गुज़र चुके हैं। ताहम सरकारी ज़राए के मुताबिक़ उत्तराखंड में जारी बजट इजलास की वजह से चीफ़ मिनिस्टर इस बात पर फ़ैसला नहीं कर पारहे हैं कि कौनसा क़लमदान किन‌ के ज़िम्मा किया जाये।

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