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क़ादियानीयों की जायदादों के इख़राज(बहिश्कार‌) का खैर मक़दम

(सियासत न्यूज़) आंधरा प्रदेश रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड ने क़ादियानीयों की जायदादों के इख़राज और हिन्दू इंडोमेंट को हवाले करने के लिए क़रारदाद मंज़ूर करते हुए मुल्क भर में एक तारीख़ साज़(इत्तिहासि) फ़ैसला किया है। इस तारीख़ साज़ फ़ैसला को नज

(सियासत न्यूज़) आंधरा प्रदेश रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड ने क़ादियानीयों की जायदादों के इख़राज और हिन्दू इंडोमेंट को हवाले करने के लिए क़रारदाद मंज़ूर करते हुए मुल्क भर में एक तारीख़ साज़(इत्तिहासि) फ़ैसला किया है। इस तारीख़ साज़ फ़ैसला को नज़ीर बनाते हुए रियास्ती-ओ-मर्कज़ी हुकूमतों को चाहीए कि वो इस बातिल फ़िर्क़ा(अस्त्य धर्म) को किसी भी मुक़ाम पर मज़हब की जगह पर इस्लाम लिखने की इजाज़त ना दे चूँकि इस फ़िर्क़ा के अक़ाइद(धर्म विश्वास) बिलकुल्लिया तौर पर कुफ़रीया हैं, जिसे तमाम मसालिक ने मुत्तफ़िक़ा तौर पर क़बूल किया है और इस फ़िर्क़ा को ख़ारिज इस्लाम क़रार दिया जा चुका है।

सदर जमाअत उलेमा हिंद आंधरा प्रदेश मौलाना हाफ़िज़ पीर शब्बीर अहमद रुक्न क़ानूनसाज़ कौंसल ने आंधरा प्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के फ़ैसले का ख़ौरमक़दम करते हुए कहा कि सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड मौलाना ग़ुलाम अफ़ज़ल ब्याबानी ख़ुसरो पाशाह और अरकान क़ाबिल मुबारकबाद हैं जिन्हों ने बातिल फ़िरक़े के ख़िलाफ़ क़रारदाद मंज़ूर करते हुए जुरुर‌त मंदाना इक़दाम किया है।

उन्हों ने बताया कि बरसों से मुस्लमानों में फैली इस बेचैनी को दूर करने के लिए वक़्फ़ बोर्ड ने जो इक़दाम किया है, इस की जितनी सराहना की जाय कम है।

मौलाना हाफ़िज़ पीर शब्बीर अहमद ने बताया कि आंधरा प्रदेश रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड की जानिब से क़ादियानीयों की जायदादों को औक़ाफ़ रजिस्टर से ख़ारिज किए जाने के फ़ैसले के बाद आम मुस्लमानों को क़ादियानीयों के मुताल्लिक़ तफ़सीलात से आगाह करवाने में आसानी होगी।

उन्हों ने बताया कि साबिक़ सदर नशीन जनाब इल्यास सेठ ने अपने दौर-ए-सदारत में जो एलामीया क़ादियानीयों के मुताल्लिक़ जारी किया था, इस के ज़रीया जमीअत उलेमा हिंद की जानिब से अज़ला में मुस्लमानों का शऊर बेदार किया गया , अब जबकि बाज़ाबता इस फ़िर्क़ा के ख़िलाफ़ क़रारदाद मंज़ूर की गई है और उसे सरकारी सतह पर ख़ारिज इस्लाम तसव्वुर करने का ऐलान किया गया है तो इस से अज़ला के मुस्लमानों में फैल रहे इर्तिदाद(धर्मा तर‌ण) को रोकने में ज़बरदस्त तआवुन(सहायता) हासिल होगा।

मौलाना हाफ़िज़ पीर शब्बीर अहमद ने बताया कि सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड मौलाना ग़ुलाम अफ़ज़ल ब्याबानी ख़ुसरो पाशाह की जानिब से किए गए इक़दाम से हिंदूस्तान में एक मिसाल क़ायम हुई है और जमाअत उलेमा हिंद इस मिसाल को बुनियाद बनाते हुए सारे मुल्क में इस तरह के फ़ैसले सादर करने के लिए बड़े पैमाने पर मुहिम चलाएगी।

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