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कांग्रेस के नक़श-ए-क़दम पर बी जे पी से भी बाग़ी क़ाइदीन का इख़राज

देहरादून, २१ जनवरी (पी टी आई) कांग्रेस ने हाल ही में पार्टी मुख़ालिफ़ सरगर्मीयों में मुलव्वस अपने 11 अरकान को पार्टी से ख़ारिज कर दिया गया। इस वाक़िया को हालाँकि ज़्यादा दिन नहीं गदरे हैं लेकिन अब ऐसा लगता है कि कांग्रेस के नक्श-ए-क़दम पर ब

देहरादून, २१ जनवरी (पी टी आई) कांग्रेस ने हाल ही में पार्टी मुख़ालिफ़ सरगर्मीयों में मुलव्वस अपने 11 अरकान को पार्टी से ख़ारिज कर दिया गया। इस वाक़िया को हालाँकि ज़्यादा दिन नहीं गदरे हैं लेकिन अब ऐसा लगता है कि कांग्रेस के नक्श-ए-क़दम पर बी जे पी भी चल रही है।

बी जे पी तर्जुमान सतीश लखेरा के ब्यान के मुताबिक़ कि हम उसे अरकान पर नज़र रख रहे हैं जो बग़ावत के लिए पर तूल रहे हैं और उन की निशानदेही भी की जाएगी जो पार्टी मुख़ालिफ़ सरगर्मीयों में मुलव्वस हैं। कांग्रेस की ही तरह हम भी पार्टी के मुफ़ाद के ख़िलाफ़ काम करने वालों को ये इंतिबाह देना चाहते हैं कि वो सख़्त से सख़्त कार्रवाई के लिए तैयार रहे।

यहां इस बात का तज़किरा दिलचस्पी से ख़ाली ना होगा कि कांग्रेस ने अब तक अपने 32 बाग़ी क़ाइदीन को बाहर का रास्ता दिखाया है, जिन में जूट

सिंह यसट और मंत्री प्रसाद नैथानी भी शामिल हैं। ये वो क़ाइदीन हैं जो रियासत के लिए अजनबी नहीं हैं। अवाम उन्हें अच्छी तरह पहचानते हैं। कांग्रेस के रियास्ती तर्जुमान सुरेंद्र कुमार के मुताबिक़ तमाम 32 बाग़ी कांग्रेस अब बाग़ी उम्मीदवारों की हैसियत से इंतेख़ाबात लड़ रहे हैं।

कांग्रेस और बी जे पी ने जब अपनी सफ़ों में पाई जाने वाली बग़ावत को रोकने में कामयाबी हासिल नहीं की लिहाज़ा दोनों ही पार्टीयों ने अपने बाग़ी उम्मीदवारों को पार्टी से ख़ारिज करने का अमल शुरू करदिया।

बी जे पी ने अब तक 22 क़ाइदीन को ख़ारिज किया है, जिन में 4 मौजूदा एम एल ए केदार सिंह फ़ो नयार राज कुमार, जी एल शाह और अनील कोटियाल के नाम भी काबिल-ए-ज़िकर हैं। यहां इस बात का ज़िक्र भी ज़रूरी है कि क़ौमी सियासत में अब ये एक रिवायत बनती जा रही है कि अगर किसी पार्टी से ताल्लुक़ रखने वाले क़ाइद को इंतेख़ाबात लड़ने के लिए इसी पार्टी से टिकट नहीं मिलता तो वो बाग़ी होजाता है और बतौर बाग़ी उम्मीदवार इंतेख़ाबी मैदान में उतर जाता है।

सयासी तजज़िया निगारों का कहना है कि उस नौईयत की बग़ावत से जहां ग़ैर मुस्तहिक़ उम्मीदवारों के हौसले पस्त हो रहे हैं, वहीं इस बात को भी यक़ीनी बनाना चाहीए कि पार्टी टिकट मुस्तहिक़ उम्मीदवारों को ही दिए जाएं।

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