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काबीना की तौसिह, एक पर पेंच

अटकलों- कयासों के दरमियान और डेढ़ महीने से ज़्यादा वक़्त के बाद जुमेरात की शाम झारखंड में काबीना की तौसिह हुआ। छह एमएलए को गवर्नर डॉ सैयद अहमद ने ओहदे की हल्फ बरदारी दिलाई। इनमें चार भारतीय जनता पार्टी के एमएलए हैं। दो लोग हाल ही में

अटकलों- कयासों के दरमियान और डेढ़ महीने से ज़्यादा वक़्त के बाद जुमेरात की शाम झारखंड में काबीना की तौसिह हुआ। छह एमएलए को गवर्नर डॉ सैयद अहमद ने ओहदे की हल्फ बरदारी दिलाई। इनमें चार भारतीय जनता पार्टी के एमएलए हैं। दो लोग हाल ही में झारखंड विकास मोर्चा से बीजेपी में शामिल हुए हैं। इस दरमियान नए वज़ीरों के दरमियान वजीरे आला रघुवर दास ने महकमा का भी बंटवारा कर दिया है। हालांकि तौसिह के बाद भी काबीना में एक जगह खाली है। दरअसल इस जगह को लेकर पेंच फंसा है। काबीना में वजीरे आला समेत 12 वज़ीरों की जगह मुकर्रर है।

हुकूमत में अब एक और वज़ीर कौन बनेगा, इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी की इत्तिहाद साथी आजसू पार्टी पहले से काबीना में दो लोगों को शामिल किए जाने की मांग उठाती रही है। पांच एमएलए वाली आजसू पार्टी का भारतीय जनता पार्टी के साथ इंतिख़ाब से पहले इत्तिहाद है।

आजसू के सीनियर एमएलए कमलकिशोर भगत वज़ीर ओहदे के दावेदार हैं। वज़ीर नहीं बनाये जाने पर मीडिया के सामने उन्होंने नाराजगी भी जताई है। इधर जेवीएम छोड़ बीजेपी में शामिल होने वाले छह एमएलए में नवीन जायसवाल वज़ीर ओहदे के दावेदार माने जा रहे थे। नवीन जायसवाल दूसरी बार इंतिख़ाब जीते हैं। इससे पहले वे आजसू के टिकट से इंतिख़ाब जीते थे।
सियासी गलियारे में इसकी बहस है कि आजसू और नवीन जायसवाल के दरमियान ही पेंच फंसा है। इस दरमियान कांग्रेस के तर्जुमान लालकिशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि बीजेपी को ये बताना चाहिए कि काबीना की पूरी तौसिह में उसे किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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