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कारगिल जंग के बारे में नवाज़ शरीफ़ शायद ला इल्म नहीं थे : जसवंत सिंह

साबिक़ वज़ीर-ए-ख़ारजा जसवंत सिंह ने आज एक ऐसी बात कही जो यक़ीनन तनाज़ा पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि 1999 में कारगिल पर पाकिस्तान अफ़्वाज के हमले के बारे में उन्हें पूरी तरह इल्म होगा।

साबिक़ वज़ीर-ए-ख़ारजा जसवंत सिंह ने आज एक ऐसी बात कही जो यक़ीनन तनाज़ा पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि 1999 में कारगिल पर पाकिस्तान अफ़्वाज के हमले के बारे में उन्हें पूरी तरह इल्म होगा।

याद रहे कि उस वक़्त भी नवाज़ शरीफ़ ही पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म थे हालाँकि उन्होंने बारहा इस बात की तरदीद की है कि कारगिल पर फ़ौज के हमले से उन्हें ला इल्म रखा गया था। अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए जसवंत सिंह ने कहा कि ताज्जुब की बात है कि इतने अहम मुआमले पर भी वज़ीर-ए-आज़म जैसी अज़ीम शख़्सियत को कैसे ला इल्म रखा जा सकता है?

जसवंत सिंह ने एक सवाल का जवाब देते हुए ये बात कही जहां उनसे पूछा गया था कि कारगिल पर पाकिस्तानी हमले के मुताल्लिक़ नवाज़ शरीफ़ का ये इस्तिदलाल कि उन्हें ला इल्म रखा गया था, कहाँ तक दुरुस्त है और इसके बारे में (जसवंत) क्या ख़्याल है जिसके नतीजा में दोनों ममालिक के माबैन तीन माह तक जंग का सिलसिला जारी रहा।

दूसरी तरफ़ ये भी पूछा गया था कि उस वक़्त के फ़ौजी सरबराह जेनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने दावा किया था कि नवाज़ शरीफ़ कारगिल हमलों के बारे में जानते थे जिसका जवाब देते हुए जसवंत सिंह ने कहा कि तो फिर इस में तनाज़ा की क्या बात है? हमें रास्त तौर पर नवाज़ शरीफ़ से ही पूछ लेना चाहिए।

याद रहे कि जसवंत सिंह ने अपनी किताब इंडिया ऐट रिस्क में कारगिल जंग का भी तफ़सीली तज़किरा किया है। उन्होंने तहरीर किया है कि उस वक़्त के फ़ौजी सरबराह परवेज़ मुशर्रफ़ ने कारगिल पर हमला शायद इस लिए क्या होगा कि वो हिंदुस्तानी वज़ीर-ए-आज़म अटल बिहारी वाजपाई और नवाज़ शरीफ़ के ज़रिया दोनों ममालिक के दरमयान मुसालहती दूर पर चलाई गई लाहौर बस जैसे इक़दामात और कोशिशों को सुबू ताज करना चाहते थे।

हम ने एक मसालहती कोशिश की थी जिसे मुशर्रफ़ ने तहा-ओ-बाला कर दिया और इस के बाद दोनों ममालिक मुज़ाकरात और ख़ुशगवार ताल्लुक़ात हम्वार‌ करने के मुआमला में एक बार फिर वहीं पहुंच गए जहां से आग़ाज़ किया था। 1999 में लाहौर बस के मुसाफ़िर यन में जसवंत सिंह भी शामिल थे जिस पर आलमी सतह पर अटल बिहारी वाजपाई की एक जरा इक़दाम करने काफ़ी सताइश की गई थी।

इस वक़्त भी नवाज़ शरीफ़ ही पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म हैं और हिंदुस्तान में आइन्दा साल आम इंतिख़ाबात होने वाले हैं। नई हुकूमत की तशकील के बाद हिंद-पाक ताल्लुक़ात क्या रुख़ इख़तियार करेंगे, ये आने वाला वक़्त ही बताएगा।

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