Tuesday , October 24 2017
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कारगिल जंग में इस्तेमाल शूदा राइफ़ल्ज़ से फायरिंग

किशन बाग़ अर्श महल में पेश आए फ़िर्कावाराना तशद्दुद में बॉर्डर सेक्यूरिटी फ़ोर्स (बी एस एफ़) की गोलीयों का निशाना बने मुस्लमान क्या दहश्तगर्द या मुल्क दुश्मन सरगर्मीयों में शामिल थे।

किशन बाग़ अर्श महल में पेश आए फ़िर्कावाराना तशद्दुद में बॉर्डर सेक्यूरिटी फ़ोर्स (बी एस एफ़) की गोलीयों का निशाना बने मुस्लमान क्या दहश्तगर्द या मुल्क दुश्मन सरगर्मीयों में शामिल थे।

अवाम का सवाल हैके क्युं मुसलमानों पर बी एस एफ़ ने अपनी जदीद टेक्नालोजी वाली राइफ़लें इस्तेमाल करते हुए उनकी जान ले ली । बी एस एफ़ जो हिंदुस्तान का एक नियम फ़ौजी दस्ता है जिसे अक्सर मुल्क के सरहदी इलाक़ों में ताय्युनात किया जाता है और उन्हें जदीद टेक्नालोजी वाली (INSAS) इंसाज़ राइफ़ल्ज़ फ़राहम की जाती हैं।

इंसाज़ राइफ़ल्ज़ को नियम फ़ौजी दस्तों ने हिंदुस्तान और पाकिस्तान के दरमयान हुई 1999 की कारगिल जंग में इस्तेमाल किया था। इस राइफ़ल की गुंजाइश के ज़रीये एक मिनट में 600 गोलीयों के राउंडस चलाए जा सकते हैं जबकि उसकी हद 500 मीटर बताई जाती है।

फ़िर्कावाराना फ़सादाद में साइबराबाद के एक सीनीयर पुलिस ओहदेदार की हिदायत पर बी एस एफ़ अमला ने इंसाज़ राइफ़ल्ज़ का इस्तेमाल करते हुए अंधा धुंद गोलीयां चलाई जिस में शुजाउद्दीन ख़तीब उर्फ़ तौफ़ीक़ , मुहम्मद फ़रीद और मुहम्मद वाजिद अली उर्फ़ वली जांबाहक़ होगए।

फ़िर्कावाराना फ़सादाद से निमटने के लिए रैपिड एक्शण फ़ोर्स मौजूद है जो बगै़र मोहलिक हथियार के फ़सादाद को क़ाबू करने में माहिर है।

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