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काले धन के महत्वपूर्ण केन्द्रों का खुलासा, सरकार का बयान

नई दिल्ली: विभाग विभाग ने पिछले 3 वित्तीय वर्षों के दौरान अपने सर्च ऑपरेशन के जरिए 32,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है और यह राशि बड़े पैमाने पर शैक्षिक संस्थानों, अचल संपत्ति और अन्य मामलों में संलग्न की गई है। आयकर विभाग को उपलब्ध डेटा से पता चलता है कि काले धन को संलग्न करने का मूल विभाग अचल संपत्ति, वित्त, व्यापार, विनिर्माण शैक्षिक संस्थान और सर्विसेस शामिल हैं।

राज्य मंत्री वित्त संतोष गंगवार ने लोकसभा में एक लिखित जवाब देते हुए यह बात बताई, वर्ष 2015-16 के दौरान आयकर विभाग ने 445 स्थानों की तलाशी ली है जहां 11066 करोड़ रुपये की आय का खुलासा हुआ और यहां वाक्यांश स्वामित्व और संपत्ति की अनुमानित लागत 712.68 करोड़ रुपये है।

वर्ष 2014-15 में 545 स्थानों पर धावा करके तलाशी ली गई जहां से 10,288 करोड़ रुपये का पता चला और 761.70 करोड़ लागत संपत्ति पाए गए। इनके अलावा वर्ष 2013-14 में 569 धावे और तलाशी अभियान अंजाम दिया गया जहां से 10,791 करोड़ रुपये का पता चला और 807.84 करोड़ रुपये की संपत्ति उपलब्ध हुए। इस तरह सभी तलाशी के दौरान उपलब्ध राशि 32,146 करोड़ रुपये हो गई है।

आयकर विभाग की ओर से तलाशी के दौरान किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि जो लोग गैर परिकलित धन रखते थे उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश किया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने काले धन की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी कार्रवाई की है। इसमें राशि के रूप में 20,000 या उससे अधिक राशि के लेनदेन स्वीकार करने पर प्रतिबंध भी शामिल है ताकि बेनामी लेनदेन का पता चलाया जा सके।

2 लाख रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए पियानो का हवाला देने को अनिवार्य करार‌ दिया गया है। लोकसभा में एक और जवाब में संतोष गंगवार ने कहा कि अप्रैल और अक्टूबर के बीच संदर्भ मामलों के तहत 109 मामले दर्ज रजिस्टर कर लिए गए थे। वर्ष 2015-16 के दौरान ऐसे 138 मामले पंजीकृत कर दिए गए थे। फेमा के तहत दर्ज किए गए मामलों की जांच की गई। उपरोक्त मामलों में कुछ केस अवैध गतिविधियों और आतंकवाद से भी संबंधित थे।

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